हिंदी ही भारत की राष्ट्रभाषा हो सकती है। - वी. कृष्णस्वामी अय्यर

Find Us On:

English Hindi
Loading

कवि प्रदीप की कविताएं

 (काव्य) 
Click To download this content  
रचनाकार:

 भारत-दर्शन संकलन | Collections

कवि प्रदीप का जीवन-परिचय व कविताएं

कवि प्रदीप का जन्म 6 फरवरी 1915 को मध्यप्रदेश के छोटे से शहर में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ। आपका वास्तविक नाम रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी था। आपको बचपन से ही हिन्दी कविता लिखने में रूचि थी।

कवि प्रदीप - Kavi Pradeep

आपने 1939 में लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक तक की पढ़ाई करने के पश्चात शिक्षक बनने का प्रयत्न किया लेकिन इसी समय उन्हें मुंबई में हो रहे एक कवि सम्मेलन का निमंत्रण मिला।

1943 में  'क़िस्मत' फिल्म का गीत बहुत प्रसिद्ध हुआ था -

‘आज हिमालय की चोटी से फिर हमने ललकारा है।
दूर हटो... दूर हटो ऐ दुनियावालों हिंदोस्तान हमारा है॥'

प्रदीप का गीत के इस गीत से भला कौन भारतवासी परिचित न होगा -

'ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आँख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी।'

यह देशभक्ति-गीत कवि प्रदीप ने रचा था जो 1962 के चीनी आक्रमण के समय मारे गए भारतीय सैनिकों को समर्पित था। जब 26 जनवरी 1963 को यह गीत स्वर-सम्राज्ञी लता मंगेशकर ने गाया तो वहाँ उपस्थित सभी लोगों की आँखें नम हो गईं। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व० पं० जवाहरलाल नेहरू भी स्वयं को रोक न पाए और उनकी आँखे भी भर आई थीं।

कवि प्रदीप ने अनेक गीत लिखे जो बच्चों में अत्यंत लोकप्रिय हुए जिनमें निम्नलिखित मुख्य हैं -


'दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल।
 साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल॥'

'आओ बच्चो! तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदोस्तान की।
 इस मिट्टी से तिलक करो यह धरती है बलिदान की॥'

'हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के।
 इस देश को रखना मेरे बच्चो! संभाल के॥'

कवि प्रदीप को 1998 में 'दादा साहब फालके' पुरस्कार से अलंकृत किया गया था।  अपने गीतों से देशवासियों के दिल पर राज करने वाले कवि प्रदीप का 11 दिसम्बर 1998 को निधन हो गया।

Back

 

More To Read Under This
कभी कभी खुद से बात करो | कवि प्रदीप की कविता

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश