हिंदी जाननेवाला व्यक्ति देश के किसी कोने में जाकर अपना काम चला लेता है। - देवव्रत शास्त्री।

Find Us On:

English Hindi
Loading
राजगोपाल सिंह की ग़ज़लें (काव्य)  Click To download this content    
Author:राजगोपाल सिंह

राजगोपाल सिंह की ग़ज़लें भी उनके गीतों व दोहों की तरह सराही गई हैं। यहाँ उनकी कुछ ग़ज़लें संकलित की जा रही हैं।

 

गज़ल

चढ़ते सूरज को लोग जल देंगे
जब ढलेगा तो मुड़ के चल देंगे

मोह के वृक्ष मत उगा ये तुझे
छाँव देंगे न मीठे फल देंगे

गंदले-गंदले ये ताल ही तो तुम्हें
मुस्कुराते हुए कँवल देंगे

तुम हमें नित नई व्यथा देना
हम तुम्हें रोज़ इक ग़ज़ल देंगे

चूम कर आपकी हथेली को
हस्त-रेखाएँ हम बदल देंगे

 

- राजगोपाल सिंह

Back
More To Read Under This

 

इन चिराग़ों के | ग़ज़ल
मैं रहूँ या न रहूँ | ग़ज़ल
अजनबी नज़रों से | ग़ज़ल
मौज-मस्ती के पल भी आएंगे | ग़ज़ल
काग़ज़ी कुछ कश्तियाँ | ग़ज़ल
जितने पूजाघर हैं | ग़ज़ल
लूटकर ले जाएंगे | ग़ज़ल
बग़ैर बात कोई | ग़ज़ल
आजकल हम लोग ... | ग़ज़ल

Comment using facebook

 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 

 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश