जब हम अपना जीवन, जननी हिंदी, मातृभाषा हिंदी के लिये समर्पण कर दे तब हम किसी के प्रेमी कहे जा सकते हैं। - सेठ गोविंददास।

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कृष्ण सुकुमार की ग़ज़लें (काव्य)    Print  
Author:कृष्ण सुकुमार | Krishna Sukumar
 

कृष्ण सुकुमार की ग़ज़लें

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