अकबर से लेकर औरंगजेब तक मुगलों ने जिस देशभाषा का स्वागत किया वह ब्रजभाषा थी, न कि उर्दू। -रामचंद्र शुक्ल

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मुक्तिबोध की हस्तलिपि में कविता (काव्य)    Print  
Author:गजानन माधव मुक्तिबोध | Gajanan Madhav Muktibodh
 

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