भारत की सारी प्रांतीय भाषाओं का दर्जा समान है। - रविशंकर शुक्ल।

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वीरांगना (काव्य)    Print  
Author:केदारनाथ अग्रवाल | Kedarnath Agarwal
 

मैंने उसको
जब-जब देखा,
लोहा देखा।
लोहे जैसा
तपते देखा, गलते देखा, ढलते देखा
मैंने उसको
गोली जैसा चलते देखा।

- केदारनाथ अग्रवाल

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