भाषा का निर्माण सेक्रेटरियट में नहीं होता, भाषा गढ़ी जाती है जनता की जिह्वा पर। - रामवृक्ष बेनीपुरी।

Find Us On:

English Hindi
Loading
ज़िंदगी (काव्य)    Print  
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड
 

लाचारी है,
बीमारी है,
...फिर भी
ज़िंदगी सभी को प्यारी है!

#

- रोहित
  संपादक, भारत-दर्शन
  न्यूज़ीलैंड


Back

Comment using facebook

 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
  Captcha