भाषा का निर्माण सेक्रेटरियट में नहीं होता, भाषा गढ़ी जाती है जनता की जिह्वा पर। - रामवृक्ष बेनीपुरी।
साँप! (काव्य)    Print  
Author:अज्ञेय | Ajneya
 

साँप!

तुम सभ्य तो हुए नहीं
नगर में बसना
भी तुम्हें नहीं आया।

एक बात पूछूँ- (उत्तर दोगे?)
तब कैसे सीखा डँसना-

विष कहाँ पाया?

- अज्ञेय

 

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