हिंदी चिरकाल से ऐसी भाषा रही है जिसने मात्र विदेशी होने के कारण किसी शब्द का बहिष्कार नहीं किया। - राजेंद्रप्रसाद।

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कबीर दोहे -4 (काव्य)    Print  
Author:कबीरदास | Kabirdas
 

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