जब हम अपना जीवन, जननी हिंदी, मातृभाषा हिंदी के लिये समर्पण कर दे तब हम किसी के प्रेमी कहे जा सकते हैं। - सेठ गोविंददास।

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पूत पूत, चुप चुप
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ऋतु फागुन नियरानी हो
यथार्थ
उठो धरा के अमर सपूतो
मैं तटनी तरल तरंगा, मीठे जल की निर्मल गंगा
तुमने हाँ जिस्म तो... | ग़ज़ल
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कबीर दोहे -4
समंदर की उम्र
कबिरा आप ठगाइए...
कबीर की कुंडलियां
तुम' से 'आप'
कबीर की साखियां | संकलन
होली - मैथिलीशरण गुप्त
खेलो रंग अबीर उडावो - होली कविता
कर्मवीर
एक बूँद
सूर के पद | Sur Ke Pad
मन न भए दस-बीस - सूरदास के पद
हरि संग खेलति हैं सब फाग - सूरदास के पद
हिन्दी-भक्त
भलि भारत भूमि
मिट्ठू
गति का कुसूर
लाश - कमलेश्वर | कमलेश्वर की कहानियां
झाँसी की रानी
सुखी आदमी
मुरझाया फूल | कविता
हिंदी की दुर्दशा | हिंदी की दुर्दशा | कुंडलियाँ
अकबर और तुलसीदास
तुलसी की चौपाइयां
ठुकरा दो या प्यार करो | सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता
जगमग जगमग
स्वतंत्रता का दीपक
कोयल
वंदना के इन स्वरों में
कवि की बरसगाँठ
मेरा नया बचपन
मेरा धन है स्वाधीन कलम
विजयादशमी
गोपालदास नीरज के गीत | जलाओ दीये | Neeraj Ke Geet
बरस-बरस पर आती होली
अब तो मजहब कोई | नीरज के गीत
जितना कम सामान रहेगा | नीरज का गीत
उसने कहा था
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कौरव कौन, कौन पांडव
गोपालदास नीरज के दोहे
पाठशाला | चंद्रधर शर्मा गुलेरी
धरा को उठाओ, गगन को झुकाओ
झुक नहीं सकते | कविता
कछुआ-धरम | निबंध
मुझे न करना याद, तुम्हारा आँगन गीला हो जायेगा
हम भ्रष्टन के भ्रष्ट हमारे
जिसके हम मामा हैं
रैदास के पद
सोऽहम् | कविता
खिड़की बन्द कर दो
कर्तव्यबोध
सुनीति | कविता
अब के सावन में
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की ग़ज़ल
रैदास के दोहे
चंद्रधर शर्मा गुलेरी की लघु कथाएं
हीरे का हीरा
ख़ुशामद | लघुकथा
रैदास की साखियाँ
लेन-देन
निज भाषा उन्नति अहै
मीरा के पद - Meera Ke Pad
चीलें
मीरा के पद - Meera Ke Pad
अंगहीन धनी
मीरा के होली पद
भारतेन्दु की मुकरियां
चने का लटका | बाल-कविता
गुलेलबाज़ लड़का
मीरा के भजन
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की ग़ज़ल
दोहे | रसखान के दोहे
रसखान की पदावलियाँ | Raskhan Padawali
रसखान के फाग सवैय्ये
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मैं हिंदोस्तान हूँ | लघु-कथा
इश्तहार | लघु-कथा
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स्वतंत्रता-दिवस | लघु-कथा
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बिहारी के दोहे | Bihari's Couplets
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विडम्बना | लघु-कथा
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वरदान | मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Story by Munshi Premchand
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राष्ट्र का सेवक | लघु-कथा
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हार की जीत - प्रेमचंद
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मिस पाल - मोहन राकेश | कहानी
प्यार भरी बोली | होली हास्य कविता
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मलबे का मालिक
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दर्द की सारी लकीरों.... | ग़ज़ल 
इसको ख़ुदा बनाकर | ग़ज़ल
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मेंहदी से तस्वीर खींच ली
चुन्नी-मुन्नी
मधुर प्रतीक्षा ही जब इतनी, प्रिय तुम आते तब क्या होता?
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