राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार।

Find Us On:

English Hindi
Loading
फीजी कितना प्यारा है (काव्य)    Print  
Author:सुभाशनी लता कुमार | फीजी
 

प्रशांत महासागर से घिरा
चमचमाती सफ़ेद रेतों से भरा
फीजी द्वीप हमारा
देखो, कितना प्यारा है!
सर्वत्र छाई हरयाली ही हरयाली
फल-फूलों से भरी डाली-डाली
फसलों से लहराते गन्ने के खेतों में
गुणगुनाती मैना प्यारी है
लोग यहाँ के कितने प्यारे
कभी ‘बुला', कभी ‘राम-राम'
कह स्वागत करते
हिल-मिलकर एक दूजे का
साथ निभाते
हँसते-खेलते समय बिताते
बहुभाषीय और बहुसांस्कृति का
नारा लगाते
सच में यह!
स्वर्ग बड़ा निराला है
जन्म हुआ इस भूमि पर
अन्न यही का खाएं हम
खेले इसकी गोद में हम
अब वतन यही हमारा है
फीजी द्वीप हमारा
देखो, कितना प्यारा है।

--सुभाशनी लता कुमार

Back

Comment using facebook

 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
  Captcha