कैसे निज सोये भाग को कोई सकता है जगा, जो निज भाषा-अनुराग का अंकुर नहिं उर में उगा। - हरिऔध।

Find Us On:

English Hindi
Loading
छोटा बांस, बड़ा बांस (बाल-साहित्य )    Print  
Author:भारत-दर्शन संकलन | Collections
 

एक दिन बीरबल बादशाह अकबर के साथ बाग में सैर कर रहे थे। बीरबल साथ चलते-चलते लतीफा सुना रहे थे और अकबर उसका आनंद ले रहे थे। तभी बादशाह अकबर को घास पर पड़ा एक बांस का एक टुकड़ा दिखाई दिया। बस उन्हें बीरबल की परीक्षा लेने की सूझ गई। बीरबल को बांस का वह टुकड़ा दिखाते हुए बादशाह अकबर बोले, ‘‘बीरबल! क्या तुम इस बांस के टुकड़े को बिना काटे छोटा कर सकते हो ?''

बीरबल लतीफा सुनाते-सुनाते रुक गए और अकबर की आँखों में झांक कर उनकी मंशा पढ़ने का प्रयास किया।

अकबर कुटिलता से मुस्कराए। बीरबल समझ गया कि बादशाह सलामत उनकी परीक्षा लेना चाहते हैं।

बीरबल ने इधर-उधर देखा। तभी उन्हें एक माली हाथ में लंबा बांस लेकर जाता दिखा। बीरबल ने उस माली के पास जाकर वह बांस उससे लिया। फिर बादशाह के दिखाए घास पर पड़े उस बांस के टुकड़े की बगल में माली से लिया वह लंबा बांस रख दिया।

बीरबल बोले, ‘‘हुजूर, अब देखिए! बिना काटे ही आपका दिखाया बांस छोटा हो गया।''

बड़े बांस के सामने अब वह टुकड़ा सचमुच छोटा दिखाई पड़ता था।

बादशाह अकबर निरुत्तर हो गए। फिर बीरबल की चतुराई पर मुस्करा उठे।

[भारत-दर्शन]

 

Back

Comment using facebook

 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
  Captcha