वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - मैथिलीशरण गुप्त।

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मुक़ाबला (काव्य)    Print  
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी'
 

दमदार ने
पूरे दम से
जान लड़ा दी
मंज़िल पाने को,

और...
दुमदार ने केवल दुम हिला दी
मंज़िल हथियाने को।

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

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