पराधीनता की विजय से स्वाधीनता की पराजय सहस्रगुना अच्छी है। - अज्ञात।

Find Us On:

English Hindi
Loading
चीरहरण (काव्य)    Print  
Author:जैनन प्रसाद | फीजी
 

हँस रहे हैं आज
कई दुशासन।
द्रोपदी को निर्वस्त्र देख।
और झुके हुए हैं
गर्दन वीरों के।
सोच रहें है--
इस आधुनिक जुग में
कैसे वार करें
तीरों के।
चीखती हुई उस
अबला की पुकार
सभी को खल रहा है।
आज कृष्ण की जगह
लोगों में
दुर्योधन पल रहा है ।

-जैनन प्रसाद, फीजी

 

Back

Comment using facebook

 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
  Captcha