किसी साहित्य की नकल पर कोई साहित्य तैयार नहीं होता। - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'।

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यह दिल क्या है देखा दिखाया हुआ है  (काव्य)    Print  
Author:त्रिलोचन
 

यह दिल क्या है देखा दिखाया हुआ है
मगर दर्द कितना समाया हुआ है

मेरा दुख सुना चुप रहे फिर वो बोले
कि यह राग पहले का गाया हुआ है

झलक भर दिखा जाएँ बस उनसे कह दो
कोई एक दर्शन को आया हुआ है

न पूछो यहाँ ताप की क्या कमी है
सभी का हृदय उसमें ताया हुआ है

यही दर्द था जिसने तुमसे मिलाया
ये यों ही नहीं जी को भाया हुआ है

गढ़ा मौत का है नहीं भरने वाला
यहाँ अनगिनत का सफ़ाया हुआ है

*त्रिलोचन* सुनाओ हमें गान अपने
जहाँ दर्द जी का समाया हुआ है

- त्रिलोचन

 

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