देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

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विडम्बना  (काव्य)    Print  
Author:संजय भारद्वाज
 

ऐसा लबालब
क्यों भर दिया तूने,
बोलता हूँ तो
चर्चा होती है,
चुप रहता हूँ तो
और भी अधिक
चर्चा होती है!

संजय भारद्वाज, पुणे
ई-मेल: writersanjay@gmail.com

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