अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

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कंकड चुनचुन  (काव्य)    Print  
Author:कबीरदास | Kabirdas
 

कंकड चुनचुन महल उठाया
        लोग कहें घर मेरा। 
ना घर मेरा ना घर तेरा
        चिड़िया रैन बसेरा है॥

जग में राम भजा सो जीता ।
        कब सेवरी कासी को धाई 
कब पढ़ि आई गीता ।
        जूठे फल सेवरी के खाये  
तनिक लाज नहिं कीता ॥ 

- कबीर 

 

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