भाषा का निर्माण सेक्रेटरियट में नहीं होता, भाषा गढ़ी जाती है जनता की जिह्वा पर। - रामवृक्ष बेनीपुरी।
 
अपना जीवन.... | ग़ज़ल (काव्य)       
Author:कुँअर बेचैन

अपना जीवन निहाल कर लेते
औरों का भी ख़याल कर लेते

जब भी पूछो हो हमसे पूछो हो
आज ख़ुद से सवाल कर लेते

दिल पे जादू है बस मुहब्बत का
आप भी यह कमाल कर लेते

गर न उन पर नजर तेरी होती
लोग क्या अपना हाल कर लेते

मौत के जाल से निकलते तो
ज़िंदगी को बहाल कर लेते

ए 'कुँअर' ख़ुद पे भी नज़र रखते
अपनी भी देखभाल कर लेते

- कुअँर बेचैन

 

Back
 
 
Post Comment
 
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश