भाषा राष्ट्रीय शरीर की आत्मा है। - स्वामी भवानीदयाल संन्यासी।

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निकटता | कविता (काव्य)     
Author:विष्णु प्रभाकर | Vishnu Prabhakar

त्रास देता है जो
वह हँसता है
त्रसित है जो
वह रोता है
कितनी निकटता है
रोने और हँसने में

-- विष्णु प्रभाकर

 

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