यदि पक्षपात की दृष्टि से न देखा जाये तो उर्दू भी हिंदी का ही एक रूप है। - शिवनंदन सहाय।
 
बाजार का ये हाल है | हास्य व्यंग्य संग्रह (काव्य)       
Author:शैल चतुर्वेदी | Shail Chaturwedi

 बाज़ार का ये हाल है  - हास्य-व्यंग्य-संग्रह

 

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