भाषा का निर्माण सेक्रेटरियट में नहीं होता, भाषा गढ़ी जाती है जनता की जिह्वा पर। - रामवृक्ष बेनीपुरी।

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कृष्ण सुकुमार की ग़ज़लें (काव्य)     
Author:कृष्ण सुकुमार | Krishna Sukumar

कृष्ण सुकुमार की ग़ज़लें

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