कविता मानवता की उच्चतम अनुभूति की अभिव्यक्ति है। - हजारी प्रसाद द्विवेदी।

Find Us On:

English Hindi
उतने सूर्यास्त के उतने आसमान (काव्य)     
Author:आलोक धन्वा

उतने सूर्यास्त के उतने आसमान
उनके उतने रंग
लम्बी सड़कों पर शाम
धीरे बहुत धीरे छा रही शाम
होटलों के आसपास
खिली हुई रोशनी
लोगों की भीड़
दूर तक दिखाई देते उनके चेहरे
उनके कंधे, जानी-पहचानी आवाज़ें
कभी लिखेंगे कवि इसी देश में
इन्हें भी घटनाओं की तरह।

-आलोक धन्वा

 

Back

Comment using facebook

 
 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 

 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश