भाषा राष्ट्रीय शरीर की आत्मा है। - स्वामी भवानीदयाल संन्यासी।

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चलो मन गंगा-जमना-तीर (काव्य)     
Author:मीराबाई | Meerabai

गंगा-जमना निरमळ पाणी सीतल होत सरीर ।
बंसी बजावत गावत कान्हो संग लियाँ बळ बीर ।।

मोर मुगट पीतांबर सोहै कुण्डळ झळकत हीर ।
मीराके प्रभु गिरधर नागर चरणकॅवलपर सीर ।।

-मीरा

 

 

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