भारत-दर्शन का प्रयास प्रशंसनीय है। सात समुन्दर पार हिन्दी की निरंतर अलख जगाये रखने का शुक्रिया।
-सुरेश अग्रवाल, केसिंगा (ओड़िशा)
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बहुत दिनों के बाद वेबसाइट पर आने का मौका मिला। निश्चय ही इसमें व्यापक स्तर पर सुधार किया गया है। नए लेखकों, कवियों और बदलते भारत की घटनाओं को इसमें शामिल करते हुए इसे और रोचक तथा प्रासंगिक बनाया जा सकता है।
Aap ka paryas srahniy hain. Aap ke atha gyan sagar main kuch boondo ka daan main bhi karna chahti huin. Kuch panktiya likhi hain maine aaj kal ke halaat or jiven ki bekadri ke uper .
A glimpse into the past heritage in all its manifestations.evokes a cultural pride in each and every indian.In this context bharat darshan site fits the bill and deserves appreciation and commendation for this useful productive and inspiring venture
राष्ट्रभाषा हिंदी के साहित्य के प्रचार-प्रसार में भारत दर्शन जैसी इ-पत्रिकाओं का योगदान बेहद महत्त्वपूर्ण है । हिंदी की सेवा के इस महायज्ञ के लिए अनेक शुभकामनाएँ ।
हिंदी भाषा मेरी माता के सामान है और यदि कोई माता का अभिवादन करता है तो वह भी मेरे लिए सम्मानीय और आदरणीय हो जाता है ...आपने तो हमारी माता को न सिर्फ ऊँचे आसान में बिठा रखा है बल्कि उनकी चरण वंदन कर पूजा अर्चना कर रहे है
निश्चित रूप से यह कृत्या सराहनीय है
आप सभी पथ संचालक अवं पाठकगण के उज्जवल भविष्य के कामनाओ सहित ,
प्रभात शुक्ल भरारीवाले
रायपुर छ ग
भारतवर्ष