जब हम अपना जीवन, जननी हिंदी, मातृभाषा हिंदी के लिये समर्पण कर दे तब हम किसी के प्रेमी कहे जा सकते हैं। - सेठ गोविंददास।

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चित्र-दीर्घा :   स्वामी रामदेव से बातचीत

स्वामी रामदेव से साक्षात्कार

स्वामी रामदेव से रोहित कुमार हैप्पी का साक्षात्कार

Iस्वामी रामदेव
 

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