जब हम अपना जीवन, जननी हिंदी, मातृभाषा हिंदी के लिये समर्पण कर दे तब हम किसी के प्रेमी कहे जा सकते हैं। - सेठ गोविंददास।

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चित्र-दीर्घा :   डॉ कुंवर बेचैन ऑस्ट्रेलिया में

एक शाम डॉ कुंवर बेचैन के नाम

डा कुंवर को सुनते मंत्र-मुग्ध श्रोता

स्थानीय कवियों व शायरों के साथ डा कुंवर

डॉ कुंवर बेचैन रेखा राजवंशी के साथ
 

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