जब हम अपना जीवन, जननी हिंदी, मातृभाषा हिंदी के लिये समर्पण कर दे तब हम किसी के प्रेमी कहे जा सकते हैं। - सेठ गोविंददास।

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चित्र-दीर्घा :   Jallianwala Bagh

गोलियों के निशान

Shaheedi Kuan | शहीदी कुआँ

जलियाँवाला बाग की कहानी

अमानवीय कृत्य की बोलती तस्वीर

शहीदी स्मारक

अमर ज्योति स्मारक, जलियाँवालाबाग, अमृतसर

अमर ज्योति
 

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