देहात का विरला ही कोई मुसलमान प्रचलित उर्दू भाषा के दस प्रतिशत शब्दों को समझ पाता है। - साँवलिया बिहारीलाल वर्मा।

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हिंदी काव्य | Hindi Poetry Forum

इसमें आप काव्य की किसी भी विधा जिसमें कविताएं, क्षणिकाए, गीत, ग़ज़ल, हाइकू, मुक्तक, दोहे इत्यादि लिख सकते हैं।

 

 
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Topic Posted By mukesh bohra aman   on  Saturday, 29-Jul-2017-10:08

बाल-गीत बरखा गीत
बाल-गीत बरखा गीत खेत खड़ा इंसान, पुकारे जान । कि अब तो आ जाओ भगवान ।। कण कण सुख रही है मिट्टी, बीज की चिट्टी , कि अब तो गाओ बरसा गान । सावन भादों अब लगते है चेत, कि प्यासे खेत , कि हमसब मांग रहे है बारिश का वरदान । मोर, पपीहा, कोयल कूके, मनवा हूँके सबके अब तो कर आये है प्राण । नदियों की कब होगी कलकल, सोचूँ पलपल , कि कब आएंगे प्यारे मेह मेहमान । बाट तुम्हारी देखे हलधर, ओ मुरलीधर, घनश्याम बने, अब आ जाओ भगवान् । जन जन को फिर सम्बल देने, जल देने, कि अब तो बरसो रे भगवान् । कवि मुकेश बोहरा अमन बाड़मेर राजस्थान 344001 8104123345
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Topic Posted By Darshan    on  Wednesday, 17-May-2017-05:17

Chale aate hain nazaare
Visual poetry ....chale aate hain nazaare by Darshan Dave https://www.youtube.com/watch?v=gC-YgjMDH_8&feature=youtu.be
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Topic Posted By संतोष कुमार गौतम    on  Friday, 28-Apr-2017-09:43

संतोष कुमार
सर के ऊपर आसमां ढूंढ रहा हूं। मैं तेरे कदमों के निशां ढूंढ रहा हूं॥
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Topic Posted By Manoj Kohli   on  Saturday, 15-Apr-2017-17:27

Manoj Kohli
सर्द हवाऐ लू बन गई, चैन नहीं. किस झोंके को कैद कर लू, एक ज़ख्म भर देता है तो दुसरा कुरेद देता है
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Topic Posted By Manoj Kohli   on  Saturday, 15-Apr-2017-17:26

Manoj Kohli
इस माख्लूक् ने हर ज़रे को एबादत् गाह बना दिया. इदारो ने कफिर् के एस एह्सस् को गुह्ना बना दिया. गुमराह काले परचम को फैला कर मुंतसिर समझ बैठे. नदियों को लाल कर के पूछते हैं कि यह ज़िंदगी क्या है.
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Topic Posted By    on  Saturday, 15-Apr-2017-17:22

Manoj Kohli
सर्द हवाऐ लू बन गई चैन नहीं किस झोंके को कैद कर लू एक ज़ख्म भर देता है तो दुसरा कुरेद देता है
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Topic Posted By Vishal samarpit   on  Thursday, 26-Jan-2017-04:01

Vishal samarpit
#गीत मुस्कुरा कर मुझे ना निहारा करो गीत कैसा पढूँ कुछ ईशारा करो अभी तो निशाँ का प्रथम दौर है चाँद तारे गगन मे ना आये हुये फूल हसते रहे दिन मे जो डाल पर देखता हूँ सभी सिर झुकाये हुये रातरानी कभी भी खिले ना खिले फिर मुझे कोई भाव मिले ना मिले मन हो जब भी तुम्हारा, जो मिलने का तो कंगनो की खनक से पुकारा करो गीत कैसा पढूँ कुछ ईशारा करो मुस्कुरा कर मुझे ना निहारा करो कहाँ तक जलेगा मेरा मन वियोगी अभी तो शुरू ही हुआ है अंधेरा उस मुहूर्त को लेकर ना बैठी रहो अभी तो बहुत दूर है रे सबेरा लग ना जाये कहीं ग्रहण मेरे लिये हां मैं डरता हूँ इस बात से ओ प्रिये मेरी हर बात पर, रूठ जाती हो क्यों रूठकर मुझसे यूँ ना किनारा करो गीत कैसा पढूँ कुछ ईशारा करो मुस्कुरा कर मुझे ना निहारा करो मुस्कुरा कर झुका लो नयन बाबरे गीत का हार स्वर्णिम पिन्हा दूँ तुम्हे चंद पल मे बना दूँ नवेली दुल्हन और दुल्हन से ज्यादा सजा दूँ तुम्हे जिस नगर की डगर से प्रिये आएंगे उस नगर की डगर पुष्प बिछ जायेंगे सोलह श्रृंगार कर के, तुम मेंहदी रचा लो फिर रचे हाँथ से लट संवारा करो गीत कैसा पढूँ कुछ ईशारा करो मुस्कुरा कर मुझे ना निहारा करो ©विशालसमार्पित
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Topic Posted By sujit kumar   on  Thursday, 01-Dec-2016-12:03

sujit kumar
mahilaon ke jivan ka kast ka karan dusri mahila hoti hai
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Topic Posted By manasa vs   on  Thursday, 28-Apr-2016-14:32

मै अपनी स्वर समता अकेले बजा नहीं सकती, इसके लिए मुझे एक वादक समूह की ज़रूरत हैं.
कहते हैं कि जिंदगी में जल्दी चलना हो तो अकेले चलो परन्तु यदि दूर तक चलना हो तो मिलकर चलो. मैंने तो तय कर दिया कि मैं दूर तक चलूँगी क्योंकि मैं जानती हूँ कि मैं अपने जीवन की स्वर समता अकेले नहीं खेल सकती परन्तु मुझे एक वाद समूह की ज़रूरत हैं. यदि मुझसे कोई पूँछे कि मेरे वाद समूह में कितने अंग हैं या वे कौन कौन हैं तो मेरे लिए इसका जवाब देना थोडा मुश्किल पड़ जाएगा क्योंकि मेरे वाद समूह में कोई प्रत्येक एक या दो व्यक्ति नहीं परन्तु वे सभी व्यक्ति हैं जिन्हें मैं हमेशा से मिलती आई हूँ. हाँ पर मैं इतना ज़रूर कह सकती हूँ कि मेरे वाद समूह का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मेरे माता- पिता हैं. मेरी माँ, जो प्यार और ममता की मूर्ति हैं और मेरे पिता जो हमेशा से मुझे मेरी ज़िंदगी का सही राह दिखाते आए हैं. बात अगर मेरे दोस्तों की करे तो उनके बिना तो मेरा जीवन अधूरा हैं. एक समय ऐसा था जब मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा दुश्मन मेरा डर था. हम दोनों के बीच हमेशा खींचातानी होता रहता था परन्तु हमेशा मेरा डर जीत जाता था. तभी मेरे जिंदगी में एक नया सदस्य आया. वह कोई और नहीं बल्कि मेरी दोस्त थी. एक ऐसी दोस्त जिसने मुझे विश्वास दिलाया कि यदि हम साथ मिलकर चले तो दुनिया कि कोई भी शक्ति हमें डरा नहीं सकता. केवल व्यक्ति ही नहीं परन्तु वस्तुएं भी मेरे वाद समूह का हिस्सा हैं. एक कलम से लेकर जूते सिलने वाले मोची तक सब मेरे जिंदगी में महत्वपूर्ण हिस्सा निभाते हैं. हम सोचेंगे कि एक मोची हमारी जिंदगी का हिस्सा कैसे बन सकता हैं. पर सोचो कि चलते चलते हमारा जूता फट गया. उस समय मोची ही तो भगवन का रूप लेकर हमारे सामने हमारी सहायता करने के लिए प्रकट होता हैं. एक ऐसे व्यक्ति को मैं अपने वाद समूह से कैसे दूर कर सकती हूँ. एक कलम कि बात करे तो सोचो कि लिखते लिखते स्याही ख़तम को गयी. दूसरा कलम लेकर लिखने के अलावा हमारे पास और कोई तरीका नहीं हैं. इससे हमें यह पता चलता हैं कि बहुत छोटे छोटे चीज़ भी हमारी जिंदगी में बहुत मायने रखते हैं.एक और ऐसे व्यक्ति ने मेरी जिंदगी में महत्वपूर्ण हिस्सा बनाये रखा हैं जिन्हें पूरी दुनिया सम्मान देता हैं, जो देश का निर्माण करता हैं, जो इंसान को इंसान बनता हैं, जिसकी छाया में ज्ञान मिलता हैं, जो हमें सही दिशा की पहचान कराता हैं, वह कोई और नहीं बल्कि मेरे गुरु हैं जिन्होंने मेरी जिंदगी से अज्ञानता को दूर करके ज्ञान की ज्योती जलाई है. जिंदगी में किसी भी व्यक्ति को हम पूर्ण रूप से अपने से दूर नहीं कर सकते क्योंकि हमें कभी भी किसी की भी जरूरत पड़ सकती हैं. अगर दो व्यक्तियों के बीच समझौता न हो तो जिंदगी का आगे बढना मुश्किल हो जायेगा. कहते हैं कि एकता की किला सबसे सुरक्षित होता हैं. न वह टूटता हैं न उसमे रहने वाला कभी दुखी होता हैं. -ANAGHA PC
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Topic Posted By Moni Mishra   on  Wednesday, 17-Feb-2016-12:52

Moni Mishra
Me Ek Ladki Hu Me ek ladki hu,Ap log yeh soch rahe hoge ki isme aisi bhi kya bat hai jo mujhe apko batani chahiye,ya apko sunne me interest hona chahiye.Yahan per ap bhi sahi hai aur me bhi.Kyuki yahan me apni nahi ek ladki ke bare me bat karna chaheti hu.Aj jo me likhna chaheti hu shayed ap woh hundard time padh chuke hoge ya logo ke muh se sun chuke hoge.Me bhi manti hu ki aj jo me kahne ya likhne ja rahi hu usme nayapan kam hai.Bas yeh soch kar likh rahi hu ki shayed mera kahne ka tarika apko pasand aa jaye ya fir koi shabd koi bat apko sahi lage jo kahi suni to kai bar ho per acchi apko sirf abhi lagi.apko ajeeb lag raha hoga na ek ladki hokar ladkiyon ke bare me hi likhne ka soch rahi hu aur bhi to sabject hai na jin per bahut kuch likha ja sakta hai, har koi bas kisi ladki ke sabject ko pakad leta hai aur unhi ka dukh,unki samasayaye batane lagta hai....Very Bad... hai na... Per yahan me shayed unke dukh ya unke problems ko discuss karne ke liye kuch nahi likhna chaheti,shayed woh sare desh sari duniya ko pata hai.To mujhe apse kya bat kahni hai.Har koi Kahta hai "Ek Aurat Hi Aurat Ki Dusman Hoti Hai" Is bat ko hum sab jante hai per mante kitne log hai yeh bataye jara?ap kabhi koi news padhna ya kisi N.G.O. ki koi activity dekhna jab women ek ho jati hai to bade se bada kam bhi saral(easy) ho jata hai aur agar wahi ek dusre ki dusman ban jaye to samjho duniya khatam.kahate hai ki ek aurat ko padha do to ek pariwar,ek khandan aur ek puri pidhi samjho padh jati hai, per kya isi tarah ek insan se kharab hone se sab kuch kharab nahi ho jata hai.aj Facebook ko check karte hue ek post dekhi usme likha tha ki jab ladki vida hokar ati hai to sab dekhte hai ladki kya layi per koi yeh nahi dekhta ki woh peeche chod kar kya ayi. kitni sahi bat hai na yeh, man ko chu lene wali bat hai,hai na ? ayiye is bat ka ek dusra pahlu dekhne ki kosis karte hai ladki vida hokar ayi to sabki nigahe uske dahej per hoti hai ki kya layi hai dulhan, per woh jo layi hai uski tariff karne ya burai karne wali jo nigahe hai woh kiski hai ji haan apne sahi pahchana woh sabhi nigahe bhi aurton ki hi hai jo ya to kabhi dulhan ban chuki hai ya banne ki rah per hai,maine kabhi bhi admiyon ko yeh discuss karte nahi dekha ki fala dulhan kya layi kya nahi layi,bat bahut choti hai per yahi bat ek pure pariwar ki raton ki nind haram karne ke liye kafi hai. Aj jab hum log dahej ke karan ho rahe atyachar se ladne ko pratibadh hai to kyu nahi sabse pahle khaud ko change kare ki hume shadi me dulhan dekhne jana hai na ki wahan se aye hue saman ko. Ap log khud soche agar koi ladka yeh kahta hai me shadi me dahej nahi luga to Maa ki awaj ati hai ki ristedaro ko kya kahegi ki bahu kya layi hai,yeh to Rit hai bujurgo ne bana di hai nibhani to padegi na. ap khud bataye kya bujurgo ne jo bhi Riti banayi thi ap woh sab mante chahle aa rahe hai ya apni sahuliyat ke sath apne bahut kuch chaod diya,agar bahut kuch chod diya to fir yeh rit bhi chod deni chahiye na.Yeh sab likhna kitna asan hai na bas kah diya chod do....per itna bada khandan usme itni sari aurete aur unki bate jo sunni padegi woh alag aur bate bhi kaisi jara gaur farmaye ap log...Dahej nahi layi bahu hmmmmm jarur koi khot hoga ladke me nahi to aise hi to nahi kar dete shadi…ya fir kahege dahej nahi layi hai peta nahi sasural wale kaisa vyavhar karege uske sath.kyu hum nahi soch sakte ki agar dahej ke bina shadi hui hai to kuch aise log mil gaye hoge apas me jimhe pata hoga hi hume acchi ladki chahiye na ki paisa,ya yeh kahu ki ladki walo ko aisa pariwar mil gaya hoga jinhe apne ladke per faith hoga ki woh zindgi me apne bute per bahut kuch kar sakta hai. maine kitne hi aise pariwar dekhe hai jinki aukat ek Maruti 800 kharidne ki nahi hai aur Safari ya Honda ki car liye chalte hai,kya kabhi kisi ne yeh socha hoga ki is ek Honda car ko kharidne ke bare me tum jo soch bhi nahi sakte use tum kitne adhikar se kisi aur pariwar se mang rahe ho woh is mang ko kis tarah se pura karega.agar ap kisi ladke ke pariwar se yeh bat puchege to apko sunne ko milega ki yeh hamari nahi unki problem hai...aur ladki ka pita soch raha hota hai ki kaun si zameen bechu ya kahan se karza lu. Chaliye kisi aur bat per discuss karte hai vishay yahi rahega per is dahej ki samsya ka samadhan khojne ki kosis karte hai. Aj bhi jab kisi ke ghar me beti hoti hai to bahut se gharo me khusi to manayi jati hai per kahi na kahi dil me ek bat rahti hai kash ke ladka ho jata, ya thik hai is bar ladki hai to agali bar ladka ho jayega.kya kabhi kisi ne is bat ko sochne ki kosis ki hai ki hume ladka kyu chahiye, shayed is bat ka jawab bahut logo ke pass hoga, agar jawab hamare pass hai to hum us jawab per kam kyu nahi karte.Chaliye mera jawab kya hai me pahle woh bata deti hu apko shayed apki soch aur meri soch alag ho. Aj ladkiyon ko is duniya me ane se isliye rok diya jata hai kyuki yeh duniya safe nahi hai unke liye.Gareeb sochta hai kaun dahej ikaddha karega iske liye, madhyam warg sochta hai kaun har samay khayal rakhga iska kahi koi anhoni ho gayi to..? ladka hoga to layega bahut sara dehej,na khayal rakhna padega na chinta karni padegi uski. Mujhe lagta hai hum aurete agar than le ki hume apne bête ki shadi bina dahej ke karni hai to 80% dahej se hone wali ghatnaye kam ho jayegi,agar hum aurete dusro ki ladkiyon per ungli uthna chod de aur apne bête ,bhai ya pati ko yeh ahsas karaye ki unhe aureton ki izzat karni hai to 80% rape kam ho jayege.per yeh sab karna hume hi padega. Agar koi maa-bahan ki gali de raha hai to rokiye use woh is tarah aurton ko nahi bol sakta, kyu hum galiyon me hone wale gande shabon se khud ko alag na kare.To yahan badlao ki jarurat aur kisi me nahi sirf aurton me hai,samaz khud badal jayega yeh wada hai mera apse…
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Topic Posted By Santosh Khanna   on  Friday, 08-Jan-2016-09:04

Santosh Khanna
शब्द by Santosh Khanna जब मैं शब्दों के बीच होती हूँ अकेली नहीं होती साथ चलता है समय आकाश के संग धरती इन्द्र धनुषी हो जाती है शब्द रिश्ते-नाते, दोस्ती-संबंध सब निभाते हैं शब्द अपनी संवेदना-सरोकारों में करुणा बरसाते हैं शब्द अपने अनेक अवतारों में उज्जाला फैलाते हैं कभी अपनी भंगिमाओं से दु:खी भी कर जाते हैं। शब्द जब.बन जाते हैं प्रेरणा मैं एकाएक उठ कर फलांगने लगती हूँ नहीं देखती तब रास्ते में पड़े पत्थर झाड-झंखाड़, नुकीले कांटे पर्वत की चोटियां कितनी भी हो दुर्गम सब लांध जाती हूँ । कामना यहीं है बना रहे शब्द का साथ जैसे सागर में उर्मि, जैसे बादल में जल, जैसे सुमनों में सुरभि, जैसे कान्हा की मुरली जैसे उषा की किरण शब्द ही ब्रह है गंगा-यमुना-सरस्वती की तरह संवेदना-कल्पना-सृजन का संगम शब्द की सत्ता को नमन शब्द की सत्ता को नमन....... Editor-In-Chief, Mahila Vidhi Bharati Quarterly Journal NH/48, Shalimar Bagh, Delhi-110088 M0b. 9899651272 शब्द by Santosh Khanna जब मैं शब्दों के बीच होती हूँ अकेली नहीं होती साथ चलता है समय आकाश के संग धरती इन्द्र धनुषी हो जाती है शब्द रिश्ते-नाते, दोस्ती-संबंध सब निभाते हैं शब्द अपनी संवेदना-सरोकारों में करुणा बरसाते हैं शब्द अपने अनेक अवतारों में उज्जाला फैलाते हैं कभी अपनी भंगिमाओं से दु:खी भी कर जाते हैं। शब्द जब.बन जाते हैं प्रेरणा मैं एकाएक उठ कर फलांगने लगती हूँ नहीं देखती तब रास्ते में पड़े पत्थर झाड-झंखाड़, नुकीले कांटे पर्वत की चोटियां कितनी भी हो दुर्गम सब लांध जाती हूँ । कामना यहीं है बना रहे शब्द का साथ जैसे सागर में उर्मि, जैसे बादल में जल, जैसे सुमनों में सुरभि, जैसे कान्हा की मुरली जैसे उषा की किरण शब्द ही ब्रह है गंगा-यमुना-सरस्वती की तरह संवेदना-कल्पना-सृजन का संगम शब्द की सत्ता को नमन शब्द की सत्ता को नमन....... Editor-In-Chief, Mahila Vidhi Bharati Quarterly Journal NH/48, Shalimar Bagh, Delhi-110088 M0b. 9899651272 शब्द by Santosh Khanna जब मैं शब्दों के बीच होती हूँ अकेली नहीं होती साथ चलता है समय आकाश के संग धरती इन्द्र धनुषी हो जाती है शब्द रिश्ते-नाते, दोस्ती-संबंध सब निभाते हैं शब्द अपनी संवेदना-सरोकारों में करुणा बरसाते हैं शब्द अपने अनेक अवतारों में उज्जाला फैलाते हैं कभी अपनी भंगिमाओं से दु:खी भी कर जाते हैं। शब्द जब.बन जाते हैं प्रेरणा मैं एकाएक उठ कर फलांगने लगती हूँ नहीं देखती तब रास्ते में पड़े पत्थर झाड-झंखाड़, नुकीले कांटे पर्वत की चोटियां कितनी भी हो दुर्गम सब लांध जाती हूँ । कामना यहीं है बना रहे शब्द का साथ जैसे सागर में उर्मि, जैसे बादल में जल, जैसे सुमनों में सुरभि, जैसे कान्हा की मुरली जैसे उषा की किरण शब्द ही ब्रह है गंगा-यमुना-सरस्वती की तरह संवेदना-कल्पना-सृजन का संगम शब्द की सत्ता को नमन शब्द की सत्ता को नमन....... Editor-In-Chief, Mahila Vidhi Bharati Quarterly Journal NH/48, Shalimar Bagh, Delhi-110088 M0b. 9899651272
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Topic Posted By    on  Monday, 10-Aug-2015-06:57

vivek shrivastava
प्रखर प्रकृति निराकार आत्मा, जीवन के दो रुप| लोचन तले छाँव है, और क्षितिज तले है धूप| क्रंदन करता मानव कभी, कभी है रहता चुप| प्रयासों के पराकाष्ठा पे भी, समीर न बदले रूख| अतिवृष्टि,अल्पवृष्टि,धराकम्पन, सब माया के हैं रूप| सब माया के हैं रूप|
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Topic Posted By hrajverma   on  Wednesday, 05-Aug-2015-08:13

Hansraj Verma "Hans"
(24) महात्मा वह नि6ाङ्कत जन, बेजान बेचारा सोचता चला जा रहा था 'अकेला' हाथ में लाठी सिर पर नही बाल का तिनका सुदामा अहा! कृष्ण मिलन की चाहत में हो अधीर न निर्वस्त्र तन पर सिर्फ एक वस्त्र टकटक करता सीधा भॅंवरे सा स्वछ्रद मन में च्रिता बन अटल चला जा रहा आजादी की ओर सब कुछ होते हुये भी समझा न अपना कुछ हे राम! हे राम! हे राम! सत्य उसका पथ प्रदर्6ाक सत्याग्रह का ले अस्त्र अहिंसा उसका वस्त्र अपनी मां आजादी को लेने चला जा रहा न ह्रिदू न मुस्लिम सब एक न ई6वर न अल्लाह नाम अनेक यही उसी का आदर्6ा 'मैं' को भूल गया 'स्व' को अपनाया नंगे पैर चलने में न लगे देर काला कलूटा भिखारी झोली फेलाकर मांग रहा है अधिकार उसे वि6वास है अपने पर और था कुछ मिलेगा नही तो छीन लूंगा सब व्यर्थ न करो अनर्थ आसूं न बहाओ व्यर्थ त्याग दो स्वार्थ सब कुछ कहो साथ दो, दो साथ मिलाओ हाथ आजादी अपने आप नही मिलती उसे प्राप्त करना पड़ता हैं आंधी लाओ सत्य की अहिंसा की प्रेम की और सत्याग्रह की जिसमें धूल का गुबार हो पर, किसी ऑंख पर हो बेअसर एकदम चारो तरफ सूखा स्रनाटा हो खामो6ा आवाजे हो क्रा्रित शू्रय मे रहो आगे बढ़ो बढ़ा दो कदम 1947 नजदीक था वसुधैव कुटुम्बकम राम राज्य सर्वोदय अहिंसा सत्याग्रह.....हे राम! हे राम! हे राम!
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Topic Posted By hrajverma   on  Wednesday, 05-Aug-2015-08:12

hansraj Verma hans
(25) चाहत एक लड़की थी बड़ी नाजुक भोली शर्मिली गालगुलाबी होंठ शराबी छुपाती थी मुझसे जो, नही चाहती थी छुपाना नजरे थी तीखी यौवन से भीगी कहते हुये भी ना कुछ कह पाती लज्जा आंखो में ललचाती कामुकता थी उस चतुरचितेरे के इ्रतजार में वो एक साल ना जाने कैसे कब एक साथ किस प्रकार तीन द्घ्रटे के लिए कैसे गुजार दिये याद बहुत बुरी चीज होती है। आखिर साथ तो तीन पल का भी बुरा होता है। पर, करे भी ङ्कया अपने मन की बात किसे कहे चाहत बहुत बुरी चीज होती है। चाहे, अपनो की हो या परायो की आखिर, चाहत तो चाहत होती है। लफ्ज होठो पर मंडराते रहते है। पर जुबां पर ताले होते है। अपनो की चाहत में (के बिना) मुंह में गया एक पानी का टपका भी जहर बन जाता है। दिल लगाना आसान होता है। लेकिन उसे भुलाना ओर भी कठिन चाहत पैदा नही की जाती यह तो अपने आप ही उत्प्रन हो जाती है। चाहत के कारण ही रि6ते टूटते है। द्घर उजड़ जाते है। लेकिन यदि चाहत सच्चे दिल से की है। जीवन ही बदल जाता है।
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Topic Posted By hrajverma   on  Wednesday, 05-Aug-2015-08:04

hansraj verma
(9) पगफेरा जब किसी इंसान का स्वर्गवास हो जाता है तो लोग पगफेरे को जाते है लेकिन जब सूचना मिलती है उ्रहे मृत्यु की पहले कार्यक्रम बनाते है कब तथा कैसे जाना है। फिर कपड़े पहनते है। कपड़े रंगबिरंगे यदि कोई पथिक पूछता है रास्ते में तो शान से कहते है। पगफेरे में जा रहे है। द्घर से खु6ामिजाज मूड़ में है निकलते लेकिन जब आता है गॉंव आता है मृतक का नजदीक रोने लगती है औरते मधुर स्वर में हो सटीक लगता है मुझे ऐसे आगे बाराती पीछे बैण्ड बाजा हो । फिर जाकर सामने मृतक के द्घर बैठ जाते है। जैसे बिल्ली दुबक कर हो जा बैठी फिर शोक के कह दोचार शब्द मृतक के गुणों को गते है। बैचारा भला आदमी था चाहे सौं वर्ष का ही हो, लेकिन बहुत बुरा हुआ अस्सी भी पूरी न कर पाया जिनदगी भर दुख ही पाया फिर उठ तुर्रत जाने की कहते दबे पांव लौट आते हैं ऐसे लोग पगफेरे को जाते है। आती जब नुङ्कते की बारी नारी को पहनाते सु्रदर साड़ी फिर हॅंसीखु6ाी खाते है। मृतक को है भूल जाते है। ऐसे लोग पगफेरे को जाते है।
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Topic Posted By sajna p   on  Sunday, 10-May-2015-17:14

sajna p
pyari mummy jag udo jag udo boli meri pyari mummy garam chaay peekar pado paad jagkar boli meri mummy rasoyi gar se jor se pado dyan se pado likhkar pado,bolkar pado yahi mery pyari mummy hameshaa jeethe rahoooooo happy mothers day
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Topic Posted By Karnika   on  Wednesday, 24-Dec-2014-16:02

हिंदी कविता : कड़कड़ाती आई ठंडी
किट किट करके बजते दांत सर्दी में जम जाते हाथ ऊनी स्वेटर भाये तन को गरम चाय ललचाये मन को सन-सनी हवा खीजवाती हैं भीनी-भीनी धूप बस याद आती हैं दिल दुखाते रोजमर्रा के काम मन कहे रजाई में घूसकर करें आराम पर घड़ी शोर मचाती हैं सबकों ठंडी में भगाती हैं दिन चढ़े भी गहरा अँधेरा चारो तरफ घना हैं कोहरा लगता हैं बादल मिलने आते हैं ठंडी का मल्हार गाते जाते हैं || कर्णिका पाठक http://www.deepawali.co.in/winter-poem-in-hindi.html
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Topic Posted By Krishan Mohan   on  Friday, 19-Dec-2014-16:30

Shabanam
f”kf”kj dh f”kfrr foHkkojh dk volku lehi Fkk] “kL; &”;key olqU/kjk ij nwokZny vkofrZr FkkA fc[kjs [k|ksrksa ds chp vkyksfdr fgeka”kq xxu e/;] fuLrC/k fu”kk esa vk;Z Hkw dks ns jgk PkkWnuh dk v/;ZA m’ekad dfEir iou dk vkslkad ls vour gqvk] “khr ls fBBqjdj lehj us tyd.kksa dks foyx fd;kAA vyx&foyx nzod.kksa us nzqe& nwokZny ij vkJ; fy;k] i`’B ruko izHkko ls eksrh&le vksl #i /kkj.k fd;kAA izkr% dky esa ef.k&le “osr fcUnq ls gks vkdf’kZr] Hkksj dh igyh fdj.k “kcue ls tkrh fyiVAA eqfDrdk dks Lo.kZ jf”e;ka m’kk dk dk lUns”k lqukrh] feyu dh bl osyk esa lrjaxh vkHkk fc[kjkrhAA HkkLdj dh jfo jf”e;ka “kwU; dks uhykHk esa djrh ifjofrZr] izfr{k.k uwru jaxksa ls “kcue dks djrh vkHkwf’krAA txex T;ksfr ls vkyksfdr “kcue gqbZ vkYgkfnr] feyu dh mRd.Bk ls pyh xxu esa jf”e jFk ij vkjksfgrA How I can convert above Hindi font matter in readable in hindi.
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Topic Posted By सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा    on  Wednesday, 19-Feb-2014-15:00

सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा
छणिकाएं सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा 1. आओ एक बार फिर बैठें साथ - साथ उन सहेजे सपनों के लिए जो सिर्फ सपना नहीं थे एक जिद थे . 2. तुम्हारे आने से रुक जाता है समय तुम्हारे जाने से कटता नहीं समय खेलता है खेल समय , या है मेरा पागलपन गिरफ्त में , समय की . 3. ढूंड़ता है प्यार सौंदर्य को प्यार तो स्व्यम ही सुंदर होता है होता है प्यार त्याग की प्रतिमूर्ति त्याग तो स्व्यम ही प्यार की देन है 4. हर शाम के साथ दिन ढल जाये यह जरूरी होता तो फिर हर सुबह के साथ दिन भी तो निकलना चाहिए था 5. नहीं चाहता मैं कि कोई तुम्हे अबला कहे पर सबला बनके तुम पुरुष की पौशाक तो मत पहनो ऐसा करने से तो प्रकृति की नैसर्गिक सुंदरता नष्ट होती है. सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा (INDIA)
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Topic Posted By Manju   on  Friday, 06-Sep-2013-15:44

Manju Ambaliya
hindi gazal ke chahnewalon ke liye,http://manjuambaliya.blogspot.in/
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Topic Posted By Rohit Kumar   on  Monday, 04-Jun-2012-06:04

ग़ज़ल क्या है?
ग़ज़ल क्या है? इसके बारे में लिखें?
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