अकबर से लेकर औरंगजेब तक मुगलों ने जिस देशभाषा का स्वागत किया वह ब्रजभाषा थी, न कि उर्दू। -रामचंद्र शुक्ल

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अमरकांत जयंती | 1 जुलाई
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दोपहर का भोजन, डिप्टी कलेक्टरी, जिंदगी और जोंक, बीच की दीवार जैसी कालजयी रचनाओं के लेखक, हिन्दी कथा साहित्य में प्रेमचंद की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले अमरकांत का जन्म 1 जुलाई, 1925 को नगरा गाँव, तहसील रसड़ा, बलिया ज़िला (उत्तर प्रदेश) के एक कायस्थ परिवार में हुआ था।

 
दोपहर का भोजन | Dophar Ka Bhojan

सिद्धेश्वरी ने खाना बनाने के बाद चूल्हे को बुझा दिया और दोनों घुटनों के बीच सिर रख कर शायद पैर की उँगलियाँ या जमीन पर चलते चीटें-चीटियों को देखने लगी।

 

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