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महाशिवरात्रि | 13 फरवरी 2018
   
 

महाशिवरात्रि हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है। प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि कहा जाता है। इन शिवरात्रियों में सबसे प्रमुख है फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी जिसे महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। इस अवसर पर उपवास रखते हैं।

महाशिवरात्रि पूजन विधि: महाशिवरात्रि को पूजा करते समय सबसे पहले मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर, ऊपर से बेलपत्र, धतूरे के पुष्प, चावल इत्यादि शिवलिंग पर चढ़ाए जाते हैं। यदि घर के आस-पास शिवालय न हो, तो शुद्ध गीली मिट्टी से ही शिवलिंग बनाकर भी उसे पूजा जाता है। इस दिन शिवपुराण का पाठ किया जाता है। शिवपुराण में महाशिवरात्रि को दिन-रात पूजा के बारे में कहा गया है और चार पहर दिन में शिवालयों में जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर बेलपत्र चढ़ाने से शिव की अनंत कृपा प्राप्त होती है। कई लोग चार पहर की पूजा भी करते हैं, जिसमें बार बार शिव का रुद्राभिषेक करना होता है।

चारों प्रहर के पूजन में शिवपंचाक्षर (नम: शिवाय) मंत्र का जाप किया जाता है। भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महान, भीम और ईशान- इन आठ नामों से फूल अर्पित कर भगवान शिव की आरती व परिक्रमा की जाती है।

यदि आपने उपवास नहीं रखा है तो भी आप सामान्य पूजन कर सकते हैं। सामान्य पूजन में शिवलिंग को पवित्र जल, दूध और मधु से स्‍नान करवाया जाता है। शिव को बेलपत्र अर्पित किया जाता है। इसके पश्चात धूप-बत्‍ती करके दीपक जलाया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। इस दिन निम्नलिखित दो मंत्रों का जाप किया जाता है:

शिव वंदना

ॐ वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं, वन्दे जगत्कारणम्।
वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं, वन्दे पशूनां पतिम्।।
वन्दे सूर्य शशांक वह्नि नयनं, वन्दे मुकुन्दप्रियम्।
वन्दे भक्त जनाश्रयं च वरदं, वन्दे शिवंशंकरम्।।


महामृत्‍युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माम् मृतात् ।।


[ भारत-दर्शन संकलन]

 

 
महाशिवरात्रि की कथा
एक बार पार्वती ने भगवान शिवशंकर से पूछा, 'ऐसा कौन सा श्रेष्ठ तथा सरल व्रत-पूजन है, जिससे मृत्यु लोक के प्राणी आपकी कृपा सहज ही प्राप्त कर लें?'

 
 
 

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