हिंदी का पौधा दक्षिणवालों ने त्याग से सींचा है। - शंकरराव कप्पीकेरी

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भारत-दर्शन संकलन | Collections

भारत-दर्शन संकलन में भारत-दर्शन द्वारा संकलित उन रचनाकारों की रचनाएं सम्मिलित की गई हैं जिनके अंतरजाल पृष्ठ अभी नहीं हैं या पृष्ठ निर्माणाधीन हैं। कुछ ऐसी रचनाएं भी सम्मिलित की गई हैं जिनके रचनाकारों की जानकारी नहीं है, उन्हें 'अज्ञात' रचनाकार के रूप में प्रकाशित किया गया है। यदि यहाँ संकलित कोई रचना 'अज्ञात' रचनाकार के रूप में प्रकाशित है और आपको इसके बारे में जानकारी है तो कृपया हमें अवश्य सूचित करें। आभार!

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ओछी मानसिकता - मीरा जैन

ढेर सारे माटी के दीयों को देखते ही सावित्री पति पर बरस पड़ी, ‘दीपावली में वैसे ही मुझे घर के काम से फुर्सत नहीं है और ऊपर से ये ढेर सारे दीये उठा लाए। अपनी इस ओछी मानसिकता को त्याग दो कि ज्यादा दीपक जलाने से ज्यादा लक्ष्मी आएगी। अरे, जितना किस्मत में होगा उतना ही मिलेगा। मैं आखिर कब तक खटती फिरूं?'

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दीया घर में ही नहीं, घट में भी जले - ललित गर्ग

दीपावली का पर्व ज्योति का पर्व है। दीपावली का पर्व पुरुषार्थ का पर्व है। यह आत्म साक्षात्कार का पर्व है। यह अपने भीतर सुषुप्त चेतना को जगाने का अनुपम पर्व है। यह हमारे आभामंडल को विशुद्ध और पर्यावरण की स्वच्छता के प्रति जागरूकता का संदेश देने का पर्व है। प्रत्येक व्यक्ति के अंदर एक अखंड ज्योति जल रही है। उसकी लौ कभी-कभार मद्धिम जरूर हो जाती है, लेकिन बुझती नहीं है। उसका प्रकाश शाश्वत प्रकाश है। वह स्वयं में बहुत अधिक देदीप्यमान एवं प्रभामय है। इसी संदर्भ में महात्मा कबीरदासजी ने कहा था-'बाहर से तो कुछ न दीसे, भीतर जल रही जोत'।

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धनतेरस | पौराणिक लेख

कार्तिक मास में  त्रयोदशी का विशेष महत्व है, विशेषत: व्यापारियों और चिकित्सा एवं औषधि विज्ञान के लिए यह दिन अति शुभ माना जाता है।

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दीप जलाओ | दीवाली बाल कविता

दीप जलाओ दीप जलाओ
आज दिवाली रे
खुशी-खुशी सब हँसते आओ
आज दिवाली रे।

मैं तो लूँगा खील-खिलौने
तुम भी लेना भाई
नाचो गाओ खुशी मनाओ
आज दिवाली आई।


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दीवाली का सामान

हर इक मकां में जला फिर दिया दिवाली का

हर इक तरफ को उजाला हुआ दिवाली का

सभी के दिन में समां भा गया दिवाली का

किसी के दिल को मजा खुश लगा दिवाली का

अजब बहार का है दिन बना दिवाली का।


जहाँ में यारो अजब तरह का है यह त्योहार

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पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म-दिवस | बाल-दिवस

14 नवंबर को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म-दिवस होता है। इसे भारत में 'बाल-दिवस' (Bal Diwas) के रूप में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। नेहरूजी को 'चाचा नेहरू' के रूप में जाने जाते हैं क्योंकि  उन्हें बच्चों से बहुत प्यार था।

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विश्व हिंदी सम्मेलन

विश्व हिंदी सम्मेलन का उद्देश्य

हिंदी को विश्व स्तर पर प्रसारित और प्रचारित करना है जिससे वैश्विक स्तर पर हिंदी को स्थापित करने में सहायता मिल सके।

प्रथम विश्व हिन्दी की संकल्पना राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा द्वारा वर्ष 1973 में की गई।सम्मेलन का उद्देश्य इस विषय पर विचार विमर्श करना था कि तत्कालीन वैश्विक परिस्थिति में हिन्दी किस प्रकार सेवा का साधन बन सकती है।

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