परमात्मा से प्रार्थना है कि हिंदी का मार्ग निष्कंटक करें। - हरगोविंद सिंह।

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कहानी गिरमिट की

फीज़ी में अनुबंधित श्रम रिपोर्ट की शताब्दी

फीजी के अनुबंधित श्रमिक

दीनबंधु सी. एफ. एंड्रयूज़ ने दक्षिण अफ्रीका व फीज़ी में बसे अनुबंधित श्रमिकों के लिए बहुत काम किया। वे सितंबर 1915 में अपने एक साथी 'डब्ल्यू. डब्ल्यू. पियरसन' के साथ फीज़ी के शर्तबंध मज़दूरों (Indentured Labourers) की परिस्थितयों की जानकारी लेने फीज़ी गये थे।

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होली से मिलते जुलते त्योहार

Holi Indian Festival

भारत व पड़ोसी देशों में तो होली मनाई ही जाती है। विश्व के कई देशों में होली-फाग से मिलते जुलते-त्योहार मनाये जाते हैं।

ऑस्ट्रेलिया के ब्रिजबन नगर से 300 किमी दूर चिनचिला में 'चिनचिला मेलन फेस्टिवल' होता है।
Chinchilla Melon Festival Australia
हर ओर तरबूज ही तरबूज कहीं तरबूजों को जूतों की तरह पहन कर लोग दौड़ते हुए प्रतियोगिता करते हैं तो कहीं तरबूज को फेंकने के खेल चलते हैं। कहीं हाथों में तरबूज उठाए हुए एक टांग से भागने (लंगड़ी दौड़) की प्रतियोगिता तो कहीं बिना हाथों का उपयोग किए तरबूज खाने की प्रतियोगिता लगती है।  इस त्योहार में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी सम्मिलित हैं। यदि आप गीत-संगीत का आनंद उठाना चाहें तो उसकी भी व्यवस्था है।

न्यूज़ीलैंड में भी होली के आयोजन विभिन्न स्तरों पर होते हैं।

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हिंदी के बारे में कुछ तथ्य
  • सरहपाद को अपभ्रंश का पहला आदि कवि कहा जा सकता है। खुसरो से कहीं पहले सरहपाद का अस्तित्व सामने आता है। राहुल सांकृत्यायन के अनुसार अपभ्रंश की पहली कृति 'सरह के दोहों' के रूप में उपलब्ध है। [ राहुल सांकृत्यायन कृत दोहा-कोश से]
  • 1283 खुसरो की पहेली व मुकरी प्रकाश में आईं जो आज भी प्रचलित हैं।
  • हिंदी की पहली ग़ज़ल संभवत: कबीर की ग़ज़ल है।
  • 1805 में लल्लू लाल की हिंदी पुस्तक 'प्रेम सागर' फोर्ट विलियम कॉलेज, कोलकाता के लिए पहली हिंदी प्रकाशित पुस्तक थी।
  • हिन्दी का पहला साप्ताहिक समाचारपत्र उदन्त मार्तण्ड पं जुगलकिशोर शुक्ल के संपादन में मई 1926 में कोलकाता से आरम्भ हुआ था।
  • पं० जामनराव पेठे को राष्ट्रभाषा का प्रस्ताव उठाने वाला पहला व्यक्ति कहा जाता है। उन्होंने सबसे पहले भारत की कोई राष्ट्रभाषा हो के मुद्दे को उठाया। 'भारतमित्र' का इस विषय में मतभेद था। 'भारतमित्र' ने 'बंकिम बाबू' को इसका श्रेय दिया है।
  • 1833 में गुजराती कवि नर्मद ने भारत की राष्‍ट्रभाषा के रूप में हिंदी का नाम प्रस्तावित किया ।
  • 1877 में श्रद्धाराम फुल्लौरी ने 'भाग्यवती' नामक उपन्यास रचा। फल्लौरी 'औम जय जगदीश हरे' आरती के भी रचयिता हैं।
  • 1893 में बनारस (वाराणसी) में नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना हुई ।
  • 1900 में द्विवेदी युग का आरंभ हुआ जिसमें राष्ट्र-धारा का साहित्य सामने आया।
  • 1918 में गाँधी जी ने 'दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा' की स्थापना की ।
  • 1929 में आचार्य रामचंद्र शुक्ल के 'हिंदी साहित्य का इतिहास' का प्रकाशन हुआ ।
  • 1931 में हिंदी की पहली बोलती फिल्म "आलम आरा" पर्दे पर आई।
  • 1996-97 में न्यूजीलैंड से प्रकाशित हिंदी पत्रिका 'भारत-दर्शन' इंटरनेट पर विश्व का पहला हिंदी प्रकाशन है। 

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ज्ञान का पाठ

डॉ० कलाम को समर्पित....


ज्ञान का पाठ उसने पढ़ाया हमें
ख्वाब भी लेना उसने सिखाया हमें

मन के आंगन में छाई जो काली घटा
गीत अभियान का गा सुनाया हमें

ख़ास होकर भी वो आदमी आम था
सादगी क्या है उसने बताया हमें

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किसे नहीं है बोलो ग़म

साँसों में है जब तक दम
किसे नहीं है बोलो ग़म!

हँस-हँस यूं तो बोल रहे हो
पर आँखें हैं क्योकर नम !

उठो, इरादे करो बुलंद
तूफ़ाँ भी जाएँगे थम !

चट्टानों से रखो इरादे
तुम्हें डिगा दे किसमें दम!

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पहचान

अपनी गली
मोहल्ला अपना,
अपनी बाणी
खाना अपना,
थी अपनी भी इक पहचान।

महानगर में बसे हुए हैं
बड़े-बड़े हैं सभी मकान,
फ़ीकी हँसी लबों पर रखते
सुंदर डाले हैं परिधान,
भीड़भाड़ में ढूँढ रहे हैं
खोई हुई अपनी पहचान।

- रोहित कुमार 'हैप्पी'


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डिजिटल इंडिया

वर्मा जी ने फेसबुक पर स्टेटस लिखा -
Enjoying in Dubai with family!
साथ में...पूरे परिवार का फोटो अपलोड किया था!

एक सप्ताह बाद लौटे तो पाया -
चोरों ने पूरा घर साफ़ कर दिया !

वर्मा जी ने देखते ही ‘फेसबुक' पर लिखा -
‘So sad! चोरों ने पूरा घर साफ़ कर दिया !'

फेसबकियों ने कमेंट्स दे-दे कर पूरा पेज भर दिया -

‘OMG!' [ओह माई गॉड!' ]
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हिंदी डे

'देखो, 14 सितम्बर को हिंदी डे है और उस दिन हमें हिंदी लेंगुएज ही यूज़ करनी चाहिए। अंडरस्टैंड?' सरकारी अधिकारी ने आदेश देते हुए कहा।

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मैं हिंदोस्तान हूँ | लघु-कथा

मैंने बड़ी हैरत से उसे देखा। उसका सारा बदन लहूलुहान था व बदन से मा‍नों आग की लपटें निकल रही थीं। मैंने उत्सुकतावश पूछा, "तुम्हें क्या हुआ है?"

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इश्तहार | लघु-कथा

"मेरा बहुत सा क़ीमती सामान जिसमें शांति, सद्‌भाव, राष्ट्र-प्रेम, ईमानदारी, सदाचार आदि शामिल हैं - कहीं गुम गया है। जिस किसी सज्जन को यह सामान मिले, कृपया मुझ तक पहुँचाने का कष्ट करे।

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