कविता मानवता की उच्चतम अनुभूति की अभिव्यक्ति है। - हजारी प्रसाद द्विवेदी।

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चायवाला

गंगाधरन पहली बार भारत आया था। भारतीय मूल का होने के कारण उसकी भारत में काफी दिलचस्पी थी और वह भारत के बारे में और अधिक जानने के इरादे से ही इस बार छुट्टियों में भारत आ पहुंचा और देहली के किसी पांच सितारा होटल में जा ठहरा था।

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कर्त्तव्यनिष्ठ

एक ने फेसबुक पर लिखा -
पिताजी बीमार हैं...
फिर अस्पताल की उनकी फोटो अपलोड कर दी
फेसबुकिया यारों ने भी
'लाइक' मार-मार कर अपनी 'ड्यूटी' पूरी कर दी।

ये भाई अपने मोबाइल पर पिताजी की हालत 'अपडेट' करते रहे,
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कौनसा हिंदी सम्मेलन?

आजकल दो हिंदी सम्मेलनों का आयोजन होता है। एक है विश्व हिंदी सम्मेलन (World Hindi Conference) और दूसरा है अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन (International Hindi Conference)।

अब आप कहेंगे भई, यह दो सम्मेलनों का औचित्य क्या है? यह तो भ्रामक है! आइए, इनके बारे में और अधिक जानकारी ले लें।

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भोपाल

भोपाल की स्थापना परमार राजा भोज ने की थी। राजा भोज ने 1010 से 1055 तक मालवा पर शासन किया था। उन्होंने भोजपाल की स्थापना की जिसे कालान्तर में 'भोपाल' के नाम से जाना जाता है।

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छोटी कविताएं

कलयुग

 

कलयुग में पाई है बस यही शिक्षा
हर बात पर मांगें हैं अग्नि-परीक्षा
बुद्ध भी अगर आज उतरें धरा पर
मांगे ना देगा उन्हें कोई भिक्षा।

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कुछ मीठे, कुछ खट्टे अनुभव : 10वां विश्व हिंदी सम्मेलन

विश्व हिंदी सम्मेलन भव्य था। इसकी सराहना भी हुई, विरोध भी, आलोचना भी और जैसा कि होता आया है यह विवादों से परे भी नहीं था।

सम्मेलन आरम्भ होने से पहले ही यह विवादों के घेरे में आ गया था। इसका प्रतीक चिन्ह, इसकी वेब साइट और सरकारी कार्यप्रणाली! इन सब का विरोध व आलोचना पहले से ही शुरू हो गई थी। आइए, आपको ले चलते हैं इस दसवें विश्व हिंदी सम्मेलन की खट्टी-मीठी यात्रा पर।

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हमारी इंटरनेट और न्यू मीडिया समझ

हमारी इंटरनेट और न्यू मीडिया समझ पर संकलित आलेख।

 

 

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कलयुग में गर होते राम

अच्छे युग में हुए थे राम
कलयुग में गर होते राम
बहुत कठिन हो जाते काम!
गर दशरथ बनवास सुनाते
जाते राम, ना जाने जाते
दशरथ वहीं ढेर हो जाते।
कलयुग में गर होते राम, बहुत कठिन हो जाते काम!

गर जाना ही बन पड़ जाता
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नये बरस में

नये बरस में कोई बात नयी चल कर लें
तुम ने प्रेम की लिखी है कथायें तो बहुत
किसी बेबस के दिल की 'आह' जाके चल सुन लें
तू अगर साथ चले जाके उसका ग़म हर लें
नये बरस में कोई बात नयी चल कर लें.....

नये बरस की दावतें हैं, जश्न हैं मनते
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कब लोगे अवतार हमारी धरती पर

फैला है अंधकार हमारी धरती पर
हर जन है लाचार हमारी धरती पर
हे देव! धरा है पूछ रही...
कब लोगे अवतार हमारी धरती पर !

तुम तो कहते थे धर्म की हानि होगी जब-जब
हर लोगे तुम पाप धरा के आओगे तुम तब-तब
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