अकबर से लेकर औरंगजेब तक मुगलों ने जिस देशभाषा का स्वागत किया वह ब्रजभाषा थी, न कि उर्दू। -रामचंद्र शुक्ल

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रघुवीर सहाय | Raghuvir Sahay

रघुवीर सहाय (Raghuvir Sahay)  का जन्म 9 दिसंबर, 1929 को लखनऊ में हुआ था।  आपने कविता, कहानी, निबंध विधाओं में साहित्य-सृजन किया। 

30 दिसंबर, 1990 को दिल्ली में आपका देहांत हो गया।

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आपकी हँसी

निर्धन जनता का शोषण है
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राष्ट्रगीत में भला कौन वह

राष्ट्रगीत में भला कौन वह
भारत-भाग्य विधाता है
फटा सुथन्ना पहने जिसका
गुन हरचरना गाता है।
मख़मल टमटम बल्लम तुरही
पगड़ी छत्र चंवर के साथ
तोप छुड़ाकर ढोल बजाकर
जय-जय कौन कराता है।
पूरब-पच्छिम से आते हैं
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तोड़ो

तोड़ो तोड़ो तोड़ो
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हमारी हिंदी

हमारी हिंदी एक दुहाजू की नई बीवी है
बहुत बोलनेवाली बहुत खानेवाली बहुत सोनेवाली

गहने गढ़ाते जाओ
सर पर चढ़ाते जाओ

वह मुटाती जाए
पसीने से गंधाती जाए घर का माल मैके पहुँचाती जाए

पड़ोसिनों से जले
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