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पांडेय बेचैन शर्मा 'उग्र'

पांडेय बेचैन शर्मा 'उग्र' (Pandey Bechan Sharma 'Ugra') को उनके राष्ट्रवादी व क्रांतिकारी लेखन के लिए जाना जाता है। पांडेय  बेचन शर्मा 'उग्र'  का जन्म उत्तर  प्रदेश के मिर्जापुर  जिले के  चुनार गांव में  हुआ था।  

पारिवारिक अभावों के  कारण वे व्यवस्थित  शिक्षान पा सके लेकिन अपनी नैसर्गिक  प्रतिभा और  साधना  से वे अपने समय के  अग्रणी गद्य शिल्पी के  रूप में  प्रतिष्ठित हुए। अपने विशेष तेवर और शैली  के  कारण  उग्र   जी अपने समय के  चर्चित लेखक  रहे व आप महाकवि निराला के मित्र थे।

आपने आज, विश्वमित्र, स्वदेश, वीणा,  स्वराज्य   और विक्रम का  संपादन किया  और  मतवाला-मंडल   के  प्रमुख      सदस्य के  रूप में आपकी विशेष पहचान रही है।

आपने कहानी और उपन्यास के अतिरिक्त आत्मकथा, संस्मरण, रेखाचित्र आदि भी लिखे। आपकी आत्मकथा अपनी खबर साहित्य  जगत  में    बहुचर्चित रही है।   आपने   महात्मा  ईसा (नाटक) और  ध्रुवधारण (खंडकाव्य) की भी    रचना  की है।

उग्र जी की कहानियों   की भाषा    सरल,  अलंकृत और व्यावहारिक है,  जिसमें उर्दू  के व्यावहारिक शब्द भी अनायास ही  आ  जाते   हैं।

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Pandey Bechan Sharma 'Ugra' | A Biography of Pandey Bechan Sharma Ugra in Hindi.

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उसकी माँ

दोपहर को ज़रा आराम  करके  उठा था।  अपने पढ़ने-लिखने  के कमरे में  खड़ा-खड़ा धीरे-धीरे सिगार पी रहा था और बड़ी-बड़ी अलमारियों  में सजे  पुस्तकालय  की ओर  निहार रहा था। किसी महान लेखक की कोई कृति उनमें से निकालकर देखने  की बात सोच रहा था। मगर, पुस्तकालय के एक सिरे से लेकर दूसरे तक मुझे महान ही महान नज़र आए।  कहीं गेटे,  कहीं रूसो, कहीं मेज़िनी, कहीं नीत्शे, कहीं शेक्सपीयर, कहीं टॉलस्टाय, कहीं ह्यूगो, कहीं मोपासाँ,  कहीं डिकेंस, सपेंसर,  मैकाले,  मिल्टन,   मोलियर---उफ़!  इधर से उधर तक एक-से-एक महान ही तो थे! आखिर मैं किसके  साथ  चंद  मिनट मनबहलाव  करूँ,  यह निश्चय ही न हो सका, महानों के नाम ही पढ़ते-पढ़ते परेशान  सा हो गया।

इतने में मोटर  की पों-पों सुनाई पड़ी। खिड़की से झाँका तो सुरमई रंग की कोई 'फिएट' गाड़ी दिखाई पड़ी। मैं सोचने लगा - शायद कोई मित्र पधारे हैं,  अच्छा ही है।  महानों से  जान बची!

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