हिंदी जाननेवाला व्यक्ति देश के किसी कोने में जाकर अपना काम चला लेता है। - देवव्रत शास्त्री।

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गुलज़ार

गुलज़ार का (वास्तविक नाम सम्पूर्ण सिंह कालरा ) जन्म 18 अगस्त, 1936 को हुआ। हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध गीतकार के अलावा आप एक कवि, पटकथा लेखक, फ़िल्म निर्देशक तथा नाटककार भी हैं।

2004 में आपको भारत के सर्वोच्च सम्मान पद्म भूषण से अलंकृत किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त उन्हें 2009 में डैनी बॉयल द्वारा निर्देशित फिल्म 'स्लम्डॉग मिलेनियर' के लिए लिखे गीत, 'जय हो' के लिए सर्वश्रेष्ठ गीत का ऑस्कर पुरस्कार मिल चुका है। इसी गीत के लिए उन्हें 'ग्रैमी एवॉर्ड' से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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महामारी लगी थी

घरों को भाग लिए थे सभी मज़दूर, कारीगर
मशीनें बंद होने लग गई थीं शहर की सारी
उन्हीं से हाथ पाओं चलते रहते थे
वगर्ना ज़िन्दगी तो गाँव ही में बो के आए थे।

वो एकड़ और दो एकड़ ज़मीं, और पांच एकड़
कटाई और बुआई सब वहीं तो थी
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मज़दूर

कुछ ऐसे कारवां देखे हैं सैंतालिस में भी मैने
ये गांव भाग रहे हैं अपने वतन में
हम अपने गांव से भागे थे, जब निकले थे वतन को
हमें शरणार्थी कह के वतन ने रख लिया था
शरण दी थी
इन्हें इनकी रियासत की हदों पे रोक देते हैं
...

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