परमात्मा से प्रार्थना है कि हिंदी का मार्ग निष्कंटक करें। - हरगोविंद सिंह।

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महंगाई

जन-गण मन के देवता, अब तो आंखें खोल
महंगाई से हो गया, जीवन डांवाडोल
जीवन डाँवाडोल, ख़बर लो शीघ्र कृपालू
कलाकंद के भाव बिक रहे बैंगन-आलू
कहं 'काका' कवि, दूध-दही को तरसे बच्चे
आठ रुपये के किलो टमाटर, वह भी कच्चे

राशन की दुकान पर, देख भयंकर भीर
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राष्ट्रीय एकता

कितना भी हल्ला करे, उग्रवाद उदंड,
खंड-खंड होगा नहीं, मेरा देश अखंड।
मेरा देश अखंड, भारती भाई-भाई,
हिंदू-मुस्लिम-सिक्ख-पारसी या ईसाई।
दो-दो आँखें मिलीं प्रकृति माता से सबको,
तीन आँख वाला कोई दिखलादो हमको।

अल्ला-ईश्वर-गॉड या खुदा सभी हैं एक,
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कार-चमत्कार | कुंडलियाँ

[इसमें 64 कार हैं, सरकार]

अहंकार जी ने कहा लेकर एक डकार, 
कितने कार प्रकार हैं, इस पर करें विचार। 
इस पर करें विचार, कार को नमस्कार है,
ओंकार में निर्विकार में व्याप्त कार है। 
निरंकार या निराकार का चक्कर छोड़ो, 
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