भाषा ही राष्ट्र का जीवन है। - पुरुषोत्तमदास टंडन।

Find Us On:

English Hindi
Loading

Author's Collection

[First] [Prev] 1 | 2

Total Number Of Record :12
नीरज के हाइकु

जन्म मरण
समय की गति के
हैं दो चरण

#

किसको मिला
वफा का दुनिया में
वफा ही सिला

#


वो हैं अकेले
दूर खड़े होकर
देखें जो मेले

#

मेरी जवानी
कटे हुये पंखों की
एक निशानी

#


वो है अपने
देखें हो मैंने जैसे
...

More...
कोई नहीं पराया

कोई नहीं पराया, मेरा घर संसार है।

मैं ना बँधा हूँ देश-काल की जंग लगी जंजीर में,
मैं ना खड़ा हूँ जाति-पाति की ऊँची-नीची भीड़ में,
मेरा धर्म ना कुछ स्याही-शब्दों का सिर्फ गुलाम है,
मैं बस कहता हूँ कि प्यार है तो घट-घट में राम है,
...

More...
[First] [Prev] 1 | 2

Total Number Of Record :12

सब्स्क्रिप्शन

Captcha Code

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश