समस्त भारतीय भाषाओं के लिए यदि कोई एक लिपि आवश्यक हो तो वह देवनागरी ही हो सकती है। - (जस्टिस) कृष्णस्वामी अय्यर

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अब्बास रज़ा अल्वी | ऑस्ट्रेलिया

अब्बास रज़ा अल्वी भारतीय मूल के ऑस्ट्रेलिया के नागरिक हैं। आपका जन्म फतेहगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ था। 

आपकी शिक्षा-दीक्षा फतेहगढ़, अलीगढ़ विश्वविद्यालय तथा मास्को में हुई।

साहित्य, संगीत, चित्रकला और अभिनय के अतिरिक्त बागबानी का भी शौक है। आपकी कई सी डी भी निकली हैं। 

 

 

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रंगीन पतंगें

अच्छी लगती थी वो सब रंगीन पतंगे
काली नीली पीली भूरी लाल पतंगे

कुछ सजी हुई सी मेलों में
कुछ टँगी हुई बाज़ारों में
कुछ फँसी हुई सी तारों में
कुछ उलझी नीम की डालों में
कुछ कटी हुई कुछ लुटी हुई
पर थीं सब अपनी गाँवों में
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