हिंदी के पुराने साहित्य का पुनरुद्धार प्रत्येक साहित्यिक का पुनीत कर्तव्य है। - पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल।

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विवेकानंद शर्मा

डॉ विवेकानंद शर्मा का जन्म 1939 में फीज़ी मे हुआ था। आपका नाम फीज़ी के प्रमुख हिंदी साहित्यकारों में सम्मिलित है।

आपकी उच्च शिक्षा भारत में हुई। आपने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए (आनर्स) तथा एम. ए (हिंदी) किया। सरदार पटेल विश्वविद्यालय, आनन्द, गुजरात से 'फीज़ी को तुलसीदास की सांस्कृतिक देन' विषय पर पी-एच.डी की।

आप फीज़ी की 'यूनीवर्सिटी ऑव द साउथ पैसेफिक' में व्याख्याता रहे।

आप फीज़ी के सांसद रहे व 'युवा एवं क्रीड़ा मंत्री' भी रहे।

फीज़ी से प्रकाशित प्रशांत समाचार, जागृति, सनातन-सन्देश, संस्कृति इत्यादि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया।

साहित्यिक कृतियाँ: आपने विभिन्न विषयों में लेखन किया। आपकी प्रकाशित कृतियाँ निम्नलिखित हैं: 'प्रशांत की लहरें', 'सरल हिन्दी व्याकरण', 'जब मानवता कराह उठी', 'फीजी में सनातन धर्म : सौ साल', विश्वकोश : भारतीय संस्कृति', 'अनजान क्षितिज की ओर'।

निधन: 9 सितंबर 2006 को ऑस्ट्रेलिया में आपका निधन हो गया।

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फीजी में हिंदी

फीजी के पूर्व युवा तथा क्रीडा मंत्री, संसद सदस्य विवेकानंद शर्मा का हिंदी के प्रति गहरा लगाव था । फीजी में हिंदी के विकास के लिए वह निरंतर प्रयत्नशील रहे।

फीजी में हिंदी भाषा के विकास का इतिहास सौ वर्ष से भी अधिक पुराना है । ऐतिहासिक दृष्टि से सन् 1879 में शर्तबंदी प्रथा के अंतर्गत भारतीय मजदूरों का प्रथम दल फीजी पहुंचा था तथा उन्हीं के द्वारा फीजी में हिंदी भाषा का भी आगमन हुआ लेकिन इधर कुछ ऐसे तथ्य प्रकाश में आए है जिनसे प्रतीत होता है कि सन् 1879 से काफी पहले फीजी के बंदरगाहों पर आने वाले अनेक जहाजों में खलासी आदि का कार्य करने वाले भारतीयों के द्वारा यह द्वीप हिंदी भाषा का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष परिचय पा चुका था ।

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