हमारी नागरी दुनिया की सबसे अधिक वैज्ञानिक लिपि है। - राहुल सांकृत्यायन।

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शिवमंगल सिंह सुमन

शिवमंगल सिंह सुमन का जन्म 05 अगस्त 1915, झगरपुर, उन्नाव, उत्तर प्रदेश में हुआ।

मुख्य कृतियां: हिल्लोल, मिट्टी की बारात, वाणी की व्यथा, प्रलय सृजन

सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार, भारत भारती पुरस्कार

निधन: 27 नवम्बर 2002 को आपका निधन हो गया

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हम पंछी उन्मुक्त गगन के

हम पंछी उन्मुक्त गगन के
पिंजरबद्ध न गा पाऍंगे
कनक-तीलियों से टकराकर
पुलकित पंख टूट जाऍंगे ।

हम बहता जल पीनेवाले
मर जाऍंगे भूखे-प्यासे
कहीं भली है कटुक निबोरी
कनक-कटोरी की मैदा से ।

स्वर्ण-श्रृंखला के बंधन में
...

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मिट्टी की महिमा

निर्मम कुम्हार की थापी से
कितने रूपों में कुटी-पिटी,
हर बार बिखेरी गई, किन्तु
मिट्टी फिर भी तो नहीं मिटी।

आशा में निश्छल पल जाए, छलना में पड़ कर छल जाए

सूरज दमके तो तप जाए, रजनी ठुमकी तो ढल जाए,
...

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