परमात्मा से प्रार्थना है कि हिंदी का मार्ग निष्कंटक करें। - हरगोविंद सिंह।

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प्रभुद‌याल‌ श्रीवास्त‌व‌

Prabhudyal Srivastva

आपका जन्म 4 अगस्त 1944, धरमपुरा दमोह, मध्य प्रदेश में हुआ। आप कहानी, कविता, बाल-साहित्य, व्यंग्य इत्यादि विधाओं में साहित्य-सृजन करते हैं। आपको 'भारती रत्न', 'भारती भूषण सम्मान', 'श्रीमती सरस्वती सिंह स्मृति सम्मान', 'लाइफ एचीवमेंट एवार्ड', 'हिंदी सेवी सम्मान', 'व्यंग्य वैभव सम्मान' मिले हैं।

साहित्य कृतियें:

व्यंग्य संग्रह : दूसरी लाइन
बाल गीत संग्रह : बचपन गीत सुनाता चल, बचपन छलके छल छल छल
गीत सुनाता चल (बाल गीत संग्रह)
बचपन छलके छल छल छल (बाल गीत संग्रह)

Author's Collection

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छन्नूजी

दाल भात रोटी मिलती तो,
छन्नू नाक चढ़ाते।
पूड़ी परांठे रोज रोज ही,
मम्मी से बनवाते।

हुआ दर्द जब पेट,रात को,
तड़फ तड़फ चिल्लाये।
बड़े डॉक्टर ने इंजेक्शन ,
आकर चार लगाये।

छन्नूजी अब दाल भात या,
रोटी ही खाते हैं।
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मछली की समझाइश‌

मेंढक बोला चलो सड़क पर.
जोरों से टर्रायें|
बादल सोया ओढ़ तानकर.
उसको शीघ्र जगायें

मछली बोली पहले तो हम.
लोगों को समझायें|
"पेड़ काटना बंद करें वे.
पर्यावरण बचायें|

- प्रभुदयाल श्रीवास्तव

 


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