बिना मातृभाषा की उन्नति के देश का गौरव कदापि वृद्धि को प्राप्त नहीं हो सकता। - गोविंद शास्त्री दुगवेकर।

Find Us On:

English Hindi

सुभाशनी लता कुमार | फीजी

सुभाशनी लता कुमार का जन्म फ़िजी में 22 जुलाई 1977 को हुआ था। आपने हिन्दी में एम.ए व इसके अतिरिक्त पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन एजुकेशन किया है। इस समय आप आई.सी.सी.आर स्कालर हैं और मैसूर विश्वविद्यालय से हिंदी में पीएच-डी कर रही हैं। आप भाषा और साहित्य विभाग, फिजी नेशनल यूनिवर्सिटी में हिंदी प्राध्यापक हैं।

आपने फीजी के प्राथमिक स्कूलों में 12 वर्ष तक अध्यापन तथा 8 वर्षों तक उच्य शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएँ प्रदान की हैं।

हिंदी परिषद फीजी की पश्चिमी शाखा की सचिव हैं। फीजी हिंदी अध्यापक संघ की सदस्य हैं।

प्रकाशन: फीजी में हिंदी भाषा, साहित्य व संस्कृति पर आधारित विभिन्न लेखों का प्रकाशन, फीजी हिंदी कहानी 'फंदा, फीजी के समाचार शांतिदूत में अनेक प्रकाशित रचनाएँ प्रकाशित। फीजी हिंदी काव्य साहित्य पर अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रपत्र पढ़े हैं।

सम्मान : 2016 में सृजन लोक, आरा, बिहार द्वारा हिन्दी सेवी सम्मान
2018 में द. मा. हि सभा मद्रास एवं वैश्विक सांस्कृतिक वैज्ञानिक परिषद, मुम्बई द्वारा हिंदी सेवी सम्मान

ई-मेल: subashnilata1977@gmail.com

Author's Collection

Total Number Of Record :2
फंदा

[फीजी से फीजी हिंदी में लघुकथा]

दुकान में सबरे से औरतन के लाइन लगा रहा। कोई बरौनी बनवाए, कोई फेसिअल कराए, कोई बार कटवाए, कोई कला कराए, तो कोई नेल-पेंट लगवाए के लिए अगोरत रहिन। दुकान के पल्ला भी खुले नई पाइस रहा कि द्वारी पे तीन औरत खड़ी अगोरत रहिन। वैसे सुक और सनिच्चर बीज़ी रोज रहे लेकिन ई रकम बिज़ी तो हम लोग कभी नहीं रहा। पतानी आज इनके सजे-सपरे के कौन भूत सवार होइगे।

...

More...
फीजी कितना प्यारा है

प्रशांत महासागर से घिरा
चमचमाती सफ़ेद रेतों से भरा
फीजी द्वीप हमारा
देखो, कितना प्यारा है!
सर्वत्र छाई हरयाली ही हरयाली
फल-फूलों से भरी डाली-डाली
फसलों से लहराते गन्ने के खेतों में
गुणगुनाती मैना प्यारी है
...

More...
Total Number Of Record :2

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश