बिना मातृभाषा की उन्नति के देश का गौरव कदापि वृद्धि को प्राप्त नहीं हो सकता। - गोविंद शास्त्री दुगवेकर।

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रेखा राजवंशी | ऑस्ट्रेलिया

रेखा राजवंशी का जन्म रेवाड़ी, हरियाणा में हुआ में हुआ था। आपका पालन-पोषण और शिक्षा उत्तर प्रदेश व दिल्ली में हुई।

रेखा राजवंशी बहुमुखी प्रतिभा की मालकिन हैं। आप लेखिका, कवयित्री व रेडियो कलाकार हैं। रेखा राजवंशी ने स्नातक स्तर तक हिंदी व अंग्रेज़ी का अध्ययन किया। मनोविज्ञान और शिक्षाशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। 'स्पेशल एडुकेशन' में मक्वारी यूनिवर्सिटी, सिडनी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। भारत में बी.एड. तथा टीचर ट्रेनिंग में अध्यापन किया। अब सिडनी में हाई स्कूल टीचर हैं। सप्ताहांत में हाई स्कूल के बच्चों को हिंदी पढ़ाने के साथ-साथ सिडनी विश्वविद्यालय में प्रौढ़ शिक्षा के अंतर्गत हिंदी पढ़ाती हैं।

दिल्ली में ऑल इंडिया रेडियो के नाटक, बाल और महिला विभाग की कलाकार, दूरदर्शन के लिए स्क्रिप्ट लेखन और वॉयस ओवर किया। सिडनी में एस.बी.एस. रेडियो में कई वर्षों से रेडियो कार्यक्रम में सहयोग देती आ रही हैं। इसके अतिरिक्त सिडनी, मेलबर्न, केनबरा और वूलून्गोंग में काव्य पाठ किया है।

ऑस्ट्रेलिया के एस बी एस ( SBS) रेडियो कार्यक्रम में कई वर्षों तक सहयोग दिया। 

आपकी रचनाएँ अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। 

अनुवाद : एन.ए.ए.टी.आई. से अनुमोदित ट्रांसलेटर हैं, कुछ सरकारी विभागों की वेबसाइट के लिए अनुवाद के अलावा ऑस्ट्रेलिया में एबोरीजनल एनीमेशन फ़िल्म की कहानियों का अनुवाद किया है।

प्रकाशित पुस्तकें : 'कंगारुओं के देश में' (काव्य संग्रह), 'अनुभूति के गुलमोहर' (काव्य-संग्रह); 'ये गलियों के बच्चे' (शोध-ग्रंथ), 'छोटे-छोटे पंख' (बाल कविताएँ), मुट्ठी भर चांदनी (ग़ज़ल संग्रह)।

संपादन : 'बूमरैंग' और 'बूमरैंग-2' (ऑस्ट्रेलिया से कविताएँ) का संपादन।

सह-संपादन : ‘एकता का संकल्प' (इंदिरा गांधी पर आधारित कविताएँ)।अन्य पुस्तकों में प्रकाशन - देशांतर, जूझते हुए, इक्कीसवीं सदी की ओर, सृजन के झरोखे से, देशांतर की कविता, वैश्विक रचनाकार भाग २, लोकप्रिय लेखिका नासिरा शर्मा द्वारा सम्पादित कहानी संग्रह।

अन्य अनेक पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशन : साप्ताहिक हिन्दुस्तान, कादम्बिनी, गगनांचल, बहुवचन, अमर उजाला, राष्ट्रीय सहारा, दिल्ली प्रेस पत्रिकाएं - गृहशोभा, सरिता आदि। अंगेज़ी कम्यूनिटी अखबारों के लिए बीस साल से अंगेज़ी में सक्रिय लेखन।

अमेरिका से प्रकाशित 'विभोम स्वर' पत्रिका की सम्पादन समिति में ऑस्ट्रेलिया से जुडी हुई हैं।

सम्मान : 2011 में विश्व् रंग-टैगोर अंतरराष्ट्रीय साहित्य और कला उत्सव में प्रवासी साहित्यकार सम्मान मिला। 2018 अंतरराष्ट्रीय हिंदी परिषद् आधारशिला फाउंडेशन द्वारा विश्व हिंदी मिशन भारत की ओर से ऑस्ट्रेलिया में हिंदी में रचनात्मक योगदान के लिए 'हिंदी गौरव सम्मान', 2017 में साउथ एशियन फिल्म आर्ट और लिटरेचर फेस्टिवल में 'साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान सम्मान', 2014 में भारतीय संस्था द्वारा 'सार्क परिकल्पना ब्लॉगर सम्मान,' 2011 में ड्रीमिंग एबोरीजनल एनिमेशन फिल्मों के अनुवाद विशेषत: 'तस्मानियन टाइगर' कृति के अनुवाद के लिए राष्ट्रीय स्तर की अनुवाद प्रतिस्पर्धा में AUSIT Excellence Award, 2010 में भारतीय विद्या भवन, ऑस्ट्रेलिया द्वारा हिंदी में योगदान के लिए सम्मान मिला। इसके अतिरिक्त अनेक संस्थाओं ने साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए इन्हें सम्मानित किया।

वक्ता के रूप में आमंत्रण :  2006 में एशिया पैसिफिक रीजनल लैंग्वेज कांफ्रेंस-सिडनी, 2013 में इंडिया ऑस्ट्रेलिया इंस्टिट्यूट मेलबर्न द्वारा आयोजित कॉन्फ्रेंस 'गोंडवानलैंडिंग्स',  2010 में प्रवासी भारतीय दिवस-सिडनी, 2014 तथा 2016 में मेलबर्न और कैनबरा में आयोजित हिंदी कार्यशाला, गोपियो रीजनल कॉन्फ्रेंस सिडनी आदि में स्पीकर के रूप में आमंत्रित।

ऑस्ट्रेलिया की इंडियन लिटरेरी एंड आर्ट सोसाइटी की भी संस्थापक और निदेशक हैं। संस्था ने भारतीय कौंसलावास के साथ 2014 में न्यू साउथ वेल्स पार्लियामेंट हाउस में युवा कविता प्रतियोगिता और 2016 में सिडनी विश्वविद्यालय के परिसर में राष्ट्रीय हिंदी सम्मलेन का आयोजन किया। हिंदी दिवस का आयोजन भी प्रति वर्ष किया जाता है। संस्था के माध्यम से पद्मश्री अशोक चक्रधर और पद्मश्री कुंवर बेचैन आदि कवियों के कार्यक्रम आयोजित किये गए।

1996 में काव्य पाठ के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया।

ब्लॉग्स :
http://sahityaaustralia.wordpress.com/
http://rekharajvanshisydney.blogspot.com/

ई-मेल : rekha_rajvanshi@yahoo.com.au

 

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देश की मिट्टी | कविता

बेटी ने
देश की मिट्टी उठाई
एक बोतल में रख
सील लगाई
सूटकेस में रख
साथ अपने लाई
जमी रहें जड़ें
अपनी जगह
विदेश में रहें
देश की तरह
मिट्टी की खुशबू
भर दे खुशहाली
देश से जाएँ
तो क्यों जाएँ ख़ाली
शायद यह बात
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दर्द के पैबंद | ग़ज़ल

मखमली चादर के नीचे दर्द के पैबंद हैं
आपसी रिश्तों के पीछे भी कई अनुबंध हैं।

दोस्त बन दुश्मन मिले किसका भरोसा कीजिए
मित्र अपनी साँस पर भी अब यहाँ प्रतिबंध है।

तोड़ औरों के घरौंदे घर बसा बैठे हैं लोग
फिर शिकायत कर रहे क्यों टूटते संबंध हैं।

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कुछ न किसी से कहें जनाब | ग़ज़ल

कुछ न किसी से कहें जनाब
अच्छा है चुप रहें जनाब

दुनिया बेहद जालिम है
हंसके सब कुछ सहें जनाब

पत्थर से न सख्त रहें
पानी बन के बहें जनाब

और कभी तो खोलें भी
अपने मन की तहें जनाब

कुछ तो मज़बूती रखिये
बालू से न ढहें जनाब

...

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ज़िन्दगी इतनी भी आसान नहीं | ग़ज़ल

ज़िन्दगी इतनी भी आसान नहीं
कौन है जो कि परेशान नहीं

जिसके दामन में हों खुशियाँ-खुशियाँ
ऐसा मिलता कोई इंसान नहीं

लेके दिल में जो सकूँ रहते हैं,
उनको भी बख्शते तूफ़ान नहीं

बन के सूरज जो खिला करते हैं
रात के साए से अनजान नहीं

...

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तेरे नाम | गीत

जाने कितनी बातें लिख दीं तेरे नाम
इश्क में डूबीं रातें लिख दीं तेरे नाम

फूलों की खुशबू से महकी-महकी सी
मदहोशी के आलम में कुछ बहकी सी
शहद भरी सौगातें लिख दीं तेरे नाम

मेंहदी के रंग, रंगे हुए अल्फ़ाज़ लिखे
...

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