साहित्य की उन्नति के लिए सभाओं और पुस्तकालयों की अत्यंत आवश्यकता है। - महामहो. पं. सकलनारायण शर्मा।

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कैलाश बुधवार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के स्नातक कैलाश बुधवार बी.बी.सी. वर्ल्ड सर्विस में हिंदी और तमिल अनुष्ठानों के एकमात्र ऐसे भारतीय संचालक रहे हैं, जिन्होंने 1970 से 1992 तक विश्व प्रसारण के सभी उत्तरदायित्व सँभाले।

बी.बीसी. द्वारा लंदन आमंत्रित किए जाने तक जो राह कैलाश बुधवार पार करते हुए आए उसमें प्रसारण, अभिनय और लेखन की अलग-अलग सीढ़ियाँ थी।

कॉलेज के दिनों में आपने लेखन, संभाषण और अभिनय के क्षेत्र में अनेक पारितोषिक प्राप्त किए और साथ ही सर्वांगीण प्रतिभा सम्पन्न छात्र की उपाधि से भी सम्मानित हुए। आगरा कॉलेज के जयंती समारोह में राष्ट्रपति के हाथों विजय शील्ड मिली। और उसी वर्ष परीक्षा में सर्वोच्च अंक आने पर वजीफा भी मिला।

लंदन की कई प्रतिष्ठित अकादमी, सोसायटी और एसोसिएशंस ने उन्हें अपनी कार्यकारिणी का आजीवन सदस्य या फैलो बनाया है और अंतर्राष्ट्रीय मंचों, गोष्ठियों और केन्द्रों पर भारत विशेषज्ञ व्याख्याता के रूप में आप अपने देश से रात-दिन सीधे जुड़े रहते हैं। हाल ही में हिन्दी समिति यू.के. ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में उनकी हिन्दी की विशेष सेवा के लिए सम्मानित किया।

 

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तमाशा खत्म

यह एक बड़ी पुरानी कहानी है जिसे आप बार-बार सुनते हैं, अक्सर गुनते हैं लेकिन फिर हमेशा भूल जाते हैं। कहानी रोज ही दोहराई जाती है-- पात्र बदल जाएँ, घटनाओं में हेर-फेर आ जाए पर कहानी वहीं की वहीं रहती है, नई और ताजी; जो मैं सुनाने जा रहा हूँ, यह उसी कहानी की एक शक्ल है।

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