राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

Find Us On:

English Hindi
Loading
दोहे
दोहा मात्रिक अर्द्धसम छंद है। इसके पहले और तीसरे चरण में 13 तथा दूसरे और चौथे चरण में 11 मात्राएं होती हैं। इस प्रकार प्रत्येक दल में 24 मात्राएं होती हैं। दूसरे और चौथे चरण के अंत में लघु होना आवश्यक है। दोहा सर्वप्रिय छंद है।

कबीर, रहीम, बिहारी, उदयभानु हंस, डा मानव के दोहों का संकलन।

Articles Under this Category

रोचक दोहे  - विकल

यह दोहे अत्यंत पठनीय व रोचक हैं चूंकि यह असाधारण दोहे हैं जिनमें न केवल लोकोक्तियाँ तथा मुहावरे प्रयोग किए गए हैं बल्कि उनका अर्थ भी दोहे में सम्मिलित है।
...

महानगर पर दोहे  - राजगोपाल सिंह

अद्भुत है, अनमोल है, महानगर की भोर
रोज़ जगाता है हमें, कान फोड़ता शोर
...

कबीर दोहे -6  - कबीरदास | Kabirdas

तब लग तारा जगमगे, जब लग उगे न सूर ।
तब लग जीव जग कर्मवश, ज्यों लग ज्ञान न पूर ॥ 101 ॥
...

पत्रकारिता : तब और अब | डॉ रामनिवास मानव के दोहे - डा रामनिवास मानव | Dr Ramniwas Manav

पत्रकारिता थी कभी, सचमुच मिशन पुनीत।
त्याग तपस्या से भरा, इसका सकल अतीत।।
...