राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

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भारतीय व्रत, त्योहार व मेले
उत्सव या त्योहार को मनाने के नियम है। उत्सवों में पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। उत्सव के आयोजन या इन्हें मनाने का अभिप्राय जीवन से दुःख मिटाना व सुख प्राप्ति है। उत्सव मनाने का अन्य उद्देश्य प्रकृति व ईश्वर के प्रति आभार प्रकट करना भी है। सागर पार बसे इस छोटे से देश न्यूज़ीलैंड में भी अपने तीज-त्योहार यथावत् रहें ऐसी हमारी भावना है। हमारे इस प्रयास में आप अपनी सामग्री का सहयोग देना चाहें तो आपका स्वागत है।

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होलिका-दहन | पृथ्वीराज चौहान का प्रश्न  - भारत दर्शन संकलन

क समय राजा पृथ्वीराज चौहान ने अपने दरबार के राज-कवि चन्द से कहा कि हम लोगों में जो होली के त्योहार का प्रचार है, वह क्या है? हम सभ्य आर्य लोगों में ऐसे अनार्य महोत्सव का प्रचार क्योंकर हुआ कि आबाल-वृद्ध सभी उस दिन पागल-से होकर वीभत्स-रूप धारण करते तथा अनर्गल और कुत्सित वचनों को निर्लज्जता-पूर्वक उच्चारण करते है । यह सुनकर कवि बोला- ''राजन्! इस महोत्सव की उत्पत्ति का विधान होली की पूजा-विधि में पाया जाता है । फाल्गुन मास की पूर्णिमा में होली का पूजन कहा गया है । उसमें लकड़ी और घास-फूस का बड़ा भारी ढेर लगाकर वेद-मंत्रो से विस्तार के साथ होलिका-दहन किया जाता है । इसी दिन हर महीने की पूर्णिमा के हिसाब से इष्टि ( छोटा-सा यज्ञ) भी होता है । इस कारण भद्रा रहित समय मे होलिका-दहन होकर इष्टि यज्ञ भी हो जाता है । पूजन के बाद होली की भस्म शरीर पर लगाई जाती है ।
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