राष्ट्रभाषा हिंदी का किसी क्षेत्रीय भाषा से कोई संघर्ष नहीं है।' - अनंत गोपाल शेवड़े

Find Us On:

English Hindi
Loading
हास्य काव्य
भारतीय काव्य में रसों की संख्या नौ ही मानी गई है जिनमें से हास्य रस (Hasya Ras) प्रमुख रस है जैसे जिह्वा के आस्वाद के छह रस प्रसिद्ध हैं उसी प्रकार हृदय के आस्वाद के नौ रस प्रसिद्ध हैं - श्रृंगार रस (रति भाव), हास्य रस (हास), करुण रस (शोक), रौद्र रस (क्रोध), वीर रस (उत्साह), भयानक रस (भय), वीभत्स रस (घृणा, जुगुप्सा), अद्भुत रस (आश्चर्य), शांत रस (निर्वेद)।

Articles Under this Category

फैशन | हास्य कविता - कवि चोंच

कोट, बूट, पतलून बिना सब शान हमारी जाती है,
हमने खाना सीखा बिस्कुट, रोटी नहीं सुहाती है ।
बिना घड़ी के जेब हमारी शोभा तनिक न पाती है,
नाक कटी है नकटाई से फिर भी लाज न आती है ।

...

लोकतंत्र का ड्रामा देख  - हलचल हरियाणवी

विदुर से नीति नहीं
चाणक्य चरित्र कहां
कुर्सी पर जा बैठे हैं
शकुनी-से मामा देख
...

रेलमपेल -  प्रदीप चौबे

भारतीय रेल की
जनरल बोगी
पता नहीं
आपने भोगी कि नहीं भोगी
एक बार
हमें करनी पड़ी यात्रा
स्टेशन पर देख कर
सवारियों की मात्रा
हमारे पसीने छूटने लगे
हम झोला उठाकर
घर की तरफ फूटने ले
तभी एक कुली आया
मुस्कुराकर बोला -
‘अन्दर जाओगे?'
हमने पूछा ‘तुम पहूँचाओगे ?'
वो बोला -
‘बड़े-बड़े पार्सल पहुंचाए हैं
आपको भी पहुँचा दूँगा
मगर रुपये पूरे पचास लूँगा!'
हमने कहा-पचास रुपैया !'
वो बोला - 'हाँ, भैया
दो रूपए आपके, बाकी सामान के ।'
हमने कहा - ‘यार सामान नहीं है,
अकेले हम हैं ।'
वो बोला - ‘बाबूजी,
आप किस सामान से कम हैं
भीड़ देख रहे हैं ?
कंधे पर उठाना पड़ेगा
धक्का देकर
अन्दर पहुँचाना पड़ेगा
मंजूर हो तो बताओ ।'
हमने कहा - 'देखा जाएगा
तुम उठाओ!'
...

सुरेन्द्र शर्मा की हास्य कविताएं  - सुरेन्द्र शर्मा

राम बनने की प्रेरणा
...

महंगाई - काका हाथरसी | Kaka Hathrasi

जन-गण मन के देवता, अब तो आंखें खोल
महंगाई से हो गया, जीवन डांवाडोल
जीवन डाँवाडोल, ख़बर लो शीघ्र कृपालू
कलाकंद के भाव बिक रहे बैंगन-आलू
कहं 'काका' कवि, दूध-दही को तरसे बच्चे
आठ रुपये के किलो टमाटर, वह भी कच्चे
...

भई, भाषण दो ! भई, भाषण दो !! - गोपालप्रसाद व्यास | Gopal Prasad Vyas

यदि दर्द पेट में होता हो
या नन्हा-मुन्ना रोता हो
या आंखों की बीमारी हो
अथवा चढ़ रही तिजारी हो
तो नहीं डाक्टरों पर जाओ
वैद्यों से अरे न टकराओ
है सब रोगों की एक दवा--
भई, भाषण दो ! भई, भाषण दो !!
...

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश