हिंदी का पौधा दक्षिणवालों ने त्याग से सींचा है। - शंकरराव कप्पीकेरी

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साक्षात्कार
साक्षात्कार के अंतर्गत हम विभिन्न लोगों से बातचीत करेंगे और उन्हें आप तक पहुँचाएंगे।

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गाँधीवाद तो अमर है - डा अरूण गाँधी  - रोहित कुमार 'हैप्पी'

डा अरूण गाँधी  से बातचीत

डरबन दक्षिण अफ्रीका में जन्में, डा अरूण गाँधी, मोहनदास कर्मचँद ‘महात्मा' गाँधी के पाँचवें पौत्र हैं। दक्षिण अफ्रीका में अपने बचपन में वे अनेक बार हिंसा से साक्षात्कार कर चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका के श्वेत और अश्वेत दोनों समुदायों की हिंसा का सामना करतेट्-करते बालक अरूण हिंसा का जवाब हिंसा से देने का मन बनाने लगा था। यही वह समय था जब अरून के माता-पिता ने उन्हें अपने दादा ‘महात्मा गांधी' के पास अहिंसा की शिक्षा लेने के लिए भारत भेजने का निश्चय किया। डा गाँधी आठ पुस्तकें और सैंकड़ों लेख लिख चुके हैं। भारत-दर्शन के संपादक रोहित कुमार ‘हैप्पी' से हुई बातचीत के मुख्य अंशः
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