कुंडलिया
हिंदी और नागरी का प्रचार तथा विकास कोई भी रोक नहीं सकता'। - गोविन्दवल्लभ पंत।

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कुंडलिया
कुंडलिया मात्रिक छंद है। दो दोहों के बीच एक रोला मिला कर कुण्डलिया बनती है। आदि में एक दोहा तत्पश्चात् रोला छंद जोड़कर इसमें कुल छह पद होते है। प्रत्येक पद में 24 मात्राएं होती हैं व आदि अंत का पद एक सा मिलता है। पहले दोहे का अंतिम चरण ही रोले का प्रथम चरण होता है तथा जिस शब्द से कुंडलिया का आरम्भ होता है, उसी शब्द से कुंडलिया समाप्त भी होती है।

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काका हाथरसी की कुंडलियाँ - काका हाथरसी | Kaka Hathrasi

पत्रकार दादा बने, देखो उनके ठाठ।
कागज़ का कोटा झपट, करें एक के आठ।।
करें एक के आ, चल रही आपाधापी ।
दस हज़ार बताएं, छपें ढाई सौ कापी ।।
विज्ञापन दे दो तो, जय-जयकार कराएं।
मना करो तो उल्टी-सीधी न्यूज़ छपाएं ।।
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