राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

Find Us On:

English Hindi
Loading
बाल-साहित्य
बाल साहित्य के अन्तर्गत वह शिक्षाप्रद साहित्य आता है जिसका लेखन बच्चों के मानसिक स्तर को ध्यान में रखकर किया गया हो। बाल साहित्य में रोचक शिक्षाप्रद बाल-कहानियाँ, बाल गीत व कविताएँ प्रमुख हैं। हिन्दी साहित्य में बाल साहित्य की परम्परा बहुत समृद्ध है। पंचतंत्र की कथाएँ बाल साहित्य का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं। हिंदी बाल-साहित्य लेखन की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। पंचतंत्र, हितोपदेश, अमर-कथाएँ व अकबर बीरबल के क़िस्से बच्चों के साहित्य में सम्मिलित हैं। पंचतंत्र की कहानियों में पशु-पक्षियों को माध्यम बनाकर बच्चों को बड़ी शिक्षाप्रद प्रेरणा दी गई है। बाल साहित्य के अंतर्गत बाल कथाएँ, बाल कहानियां व बाल कविता सम्मिलित की गई हैं।

Articles Under this Category

होली आई रे | बाल कविता - प्रकाश मनु | Prakash Manu

चिट्ठी में है मन का प्यार
चिट्ठी है घर का अखबार
इस में सुख-दुख की हैं बातें
प्यार भरी इस में सौग़ातें
कितने दिन कितनी ही रातें
तय कर आई मीलों पार।
...

नाग और चीटियां - विष्णु शर्मा

एक घने जंगल में एक बड़ा-सा नाग रहता था। वह चिड़ियों के अंडे, मेढ़क तथा छिपकलियों जैसे छोटे-छोटे जीव-जंतुओं को खाकर अपना पेट भरता था। रातभर वह अपने भोजन की तलाश में रहता और दिन निकलने पर अपने बिल में जाकर सो रहता। धीरे-धीरे वह मोटा होता गया। वह इतना मोटा हो गया कि बिल के अंदर-बाहर आना-जाना भी दूभर हो गया।
...

व्यापारी और नक़लची बंदर  - अज्ञात


...

डा रामनिवास मानव की बाल-कविताएं - डा रामनिवास मानव | Dr Ramniwas Manav

डा रामनिवास मानव की बाल-कविताएं
...

होली | बाल कविता - गीत माला

होली आई, होली आई,
रंग उड़ाती होली आई।

नन्हें-मुन्नों को भाति होली आई,

अबीर-गुलाल से खेलो होली भाई।

मतवालों की टोली चिल्लाती आई,

इन्हें गुज़िया खिलाओ भाई,

होली आई, होली आई।

...

सूरज दादा कहाँ गए तुम - आनन्द विश्वास (Anand Vishvas)

सूरज  दादा  कहाँ   गए  तुम,
...

बगीचा - आनन्द विश्वास (Anand Vishvas)

मेरे घर में बना बगीचा,
हरी घास ज्यों बिछा गलीचा।
...

होली | बाल कविता - गुलशन मदान


...

गर धरती पर इतना प्यारा  - डॉ शम्भुनाथ तिवारी

गर धरती पर इतना प्यारा,
बच्चों का संसार न होता !
...

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश